पाकिस्तान के स्कूल में अचानक भरभराकर गिरी छत, मासूम बच्चों समेत 28 की मौत! मलबे में दबे छात्रों को बचाने के लिए रेस्क्यू जारी

पेशावर: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को एक निजी स्कूल की छत गिरने से दर्दनाक हादसा हो गया। घटना के समय बच्चे कक्षाओं में मौजूद थे। अचानक इमारत का ऊपरी हिस्सा ढहने से नीचे की मंजिलों पर भी मलबा गिर गया और कई छात्र उसके नीचे दब गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग, पुलिस और बचावकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चों को मलबे से निकालने का अभियान शुरू किया।

शुरुआती खबरों में मृतकों और घायलों की संख्या अलग-अलग सामने आई। बाद में अस्पताल और स्थानीय अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों में कम से कम 28 बच्चों और एक शिक्षिका की मौत की जानकारी दी गई। कई अन्य लोग घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई। अधिकारियों ने आशंका जताई कि मलबे में फंसे लोगों की तलाश के दौरान मृतकों की संख्या में बदलाव हो सकता है।

कक्षा चल रही थी, तभी ढह गई छत

यह हादसा पेशावर के दिर कॉलोनी इलाके में स्थित अल-खैर निजी स्कूल में हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, घटना के समय छात्र कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान ऊपरी हिस्से की छत ढह गई और उसका मलबा नीचे की मंजिलों पर जा गिरा। इससे कई कक्षाएं प्रभावित हुईं और बच्चे मलबे के नीचे फंस गए।

हादसे की खबर फैलते ही बच्चों के परिजन स्कूल की ओर दौड़े। घटनास्थल पर पहुंचे परिवार अपने बच्चों की जानकारी लेने के लिए परेशान दिखाई दिए। स्थानीय लोगों ने भी बचाव अभियान में मदद की और घायल छात्रों को अस्पताल पहुंचाने में सहयोग किया।

बचाव अभियान में जुटीं टीमें

घटना के बाद पाकिस्तान की आपातकालीन सेवा रेस्क्यू 1122, पुलिस और अन्य संबंधित टीमें मौके पर पहुंचीं। बचावकर्मियों ने मलबे को सावधानी से हटाकर उसमें फंसे बच्चों और स्कूल कर्मचारियों को बाहर निकालने का प्रयास किया। घायलों को उपचार के लिए लेडी रीडिंग अस्पताल सहित अन्य चिकित्सा सुविधाओं में पहुंचाया गया।

अस्पताल में आपात स्थिति घोषित किए जाने की खबर भी सामने आई। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने घायलों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया। गंभीर रूप से घायल बच्चों को विशेष चिकित्सा सहायता देने पर जोर दिया गया।

बचाव अभियान के दौरान अधिकारियों ने बताया कि घटना के समय प्रभावित कक्षाओं में मौजूद सभी बच्चों का हिसाब मिलाना जरूरी है। इसी वजह से मलबे की तलाशी और परिजनों को जानकारी देने का काम लगातार जारी रखा गया। ऐसे हादसों में शुरुआती आंकड़े बदल सकते हैं, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या के लिए नवीनतम आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होती है।

कमजोर इमारत और छत पर अतिरिक्त भार की आशंका

पुलिस अधिकारियों के शुरुआती बयानों में इमारत की संरचना कमजोर होने और छत पर अतिरिक्त निर्माण भार पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

जांच में यह देखा जाना जरूरी होगा कि स्कूल भवन निर्माण के नियमों के अनुरूप बनाया गया था या नहीं, छत और दीवारों की मजबूती की जांच हुई थी या नहीं तथा इमारत में किसी तरह का अतिरिक्त निर्माण किया गया था या नहीं। यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का सवाल भी उठ सकता है।

फिलहाल, शुरुआती बयानों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल अहम होगी।

पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने जताया दुख

इस घटना के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुख जताया। अधिकारियों को घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों की मदद करने पर जोर दिया गया। खैबर पख्तूनख्वा के राज्यपाल फैसल करीम कुंडी ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी और हादसे के कारणों का पता लगाने के निर्देश दिए।

बच्चों की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया। इस घटना ने स्कूल भवनों की सुरक्षा और निर्माण मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पाकिस्तान में स्कूल भवनों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

पाकिस्तान में इससे पहले भी स्कूलों और अन्य इमारतों के हिस्से गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसी घटनाओं में कमजोर निर्माण, घटिया सामग्री, रखरखाव की कमी या सुरक्षा नियमों के पालन में लापरवाही जैसे कारणों की जांच की जाती है। हालांकि, हर घटना का कारण अलग हो सकता है और किसी खास मामले में निष्कर्ष जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

स्कूल ऐसी जगह हैं, जहां बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। भवन की नियमित जांच, छत और दीवारों की मजबूती का आकलन, अतिरिक्त निर्माण पर नियंत्रण और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था ऐसे हादसों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

पेशावर की यह त्रासदी प्रभावित परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है। अब जांच का उद्देश्य न केवल हादसे के कारणों का पता लगाना होगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होगा कि भविष्य में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

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