नीले ड्रम हत्याकांड में नया मोड़! मुस्कान की बेटी राधा की जिम्मेदारी लेना चाहते हैं फैजान अंसारी, कोर्ट में दी अर्जी

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड से जुड़ा एक नया घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में दोषी ठहराई गई मुस्कान रस्तोगी की 10 माह की बेटी मन्नत उर्फ राधा की परवरिश की जिम्मेदारी लेने के लिए मुंबई के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी आगे आए हैं। उन्होंने बच्ची के पालन-पोषण, शिक्षा, चिकित्सा और भविष्य के खर्च उठाने की इच्छा जताते हुए मेरठ जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया है।

इस घटनाक्रम के बाद बच्ची के भविष्य और उसकी देखभाल की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, फैजान की ओर से अर्जी दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि बच्ची की कस्टडी या अभिभावकत्व उन्हें सौंप दिया गया है। इस संबंध में फैसला निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और बच्ची के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखकर ही लिया जा सकता है।

कौन हैं फैजान अंसारी और क्यों आए चर्चा में?

फैजान अंसारी मुंबई में रहने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उन्होंने मेरठ पहुंचकर बच्ची की जिम्मेदारी उठाने की इच्छा जताई और इसके लिए अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया।

फैजान के मुताबिक, वह बच्ची की परवरिश से लेकर उसकी पढ़ाई, इलाज और भविष्य की जरूरतों का खर्च उठाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपनी आर्थिक क्षमता की जांच कराने पर भी सहमति जताई है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि वह इस जिम्मेदारी को निभाने में सक्षम हैं या नहीं।

उनकी पेशकश ऐसे समय सामने आई है, जब सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद बच्ची की देखभाल और भविष्य की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

फैजान ने बच्ची की मदद करने की इच्छा जताई है, लेकिन इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय संबंधित अधिकारियों और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

क्या है सौरभ राजपूत हत्याकांड?

मेरठ का सौरभ राजपूत हत्याकांड मार्च 2025 में सामने आया था। मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस की जांच के बाद दोनों के खिलाफ मुकदमा चला।

इस मामले को व्यापक स्तर पर चर्चा तब मिली, जब सौरभ का शव एक नीले ड्रम में छिपा हुआ मिला। इसी वजह से यह मामला ‘नीले ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चित हुआ।

30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। इस फैसले के बाद मामले से जुड़े अन्य पहलुओं, विशेषकर बच्ची के भविष्य और उसकी देखभाल की व्यवस्था को लेकर ध्यान गया।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दोषसिद्धि और सजा से जुड़े मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। वहीं, बच्ची की देखभाल का प्रश्न एक अलग कानूनी विषय है, जिसका समाधान उसके हितों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

बच्ची की परवरिश को लेकर क्या हैं सवाल?

मन्नत उर्फ राधा अभी केवल 10 माह की है। इतनी कम उम्र में उसकी देखभाल, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है।

सामने आई जानकारी के अनुसार, मृतक सौरभ राजपूत की मां रेनू देवी ने बच्ची की जिम्मेदारी उठाने में असमर्थता जताई है। इस स्थिति में बच्ची के लिए सुरक्षित और स्थायी देखभाल की व्यवस्था करने का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है।

फैजान अंसारी ने इसी संदर्भ में आगे आकर आर्थिक और पालन-पोषण संबंधी जिम्मेदारी उठाने की इच्छा व्यक्त की है। हालांकि, किसी व्यक्ति की इच्छा या आर्थिक क्षमता अपने आप उसे बच्चे का कानूनी अभिभावक नहीं बना देती।

बच्ची की देखभाल से जुड़े निर्णय में उसकी सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्थिर वातावरण और दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

क्या फैजान को मिल सकती है बच्ची की कस्टडी?

यह इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल है। जिला शासकीय अधिवक्ता के.के. चौबे के अनुसार, बच्ची से संबंधित किसी भी निर्णय में उसकी मां की इच्छा और लागू कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखना होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल अदालत में प्रार्थना पत्र देने से किसी व्यक्ति को बच्ची की कस्टडी या अभिभावकत्व का अधिकार नहीं मिल जाता। बच्ची की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

किसी बच्चे को गोद लेने और उसके भरण-पोषण में आर्थिक सहायता देने के बीच भी अंतर है। आर्थिक मदद की पेशकश का अर्थ कानूनी रूप से गोद लेने की अनुमति मिल जाना नहीं है।

इसलिए फैजान की अर्जी पर क्या निर्णय होगा, यह संबंधित कानूनी प्रावधानों, बच्ची के हितों और सक्षम प्राधिकारियों के मूल्यांकन पर निर्भर करेगा।

बच्ची की शिक्षा और भविष्य पर रहेगा ध्यान

फैजान अंसारी ने बच्ची की शिक्षा, चिकित्सा और आगे की जरूरतों का खर्च उठाने की इच्छा जताई है। उन्होंने इस जिम्मेदारी के लिए अपनी आर्थिक क्षमता की जांच कराने की बात भी कही है।

यदि उनके प्रस्ताव पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत विचार किया जाता है, तो यह देखना जरूरी होगा कि बच्ची के लिए कौन-सी व्यवस्था सुरक्षित, स्थायी और उसके हित में है।

इस मामले में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय संबंधित अधिकारियों और अदालत के निर्णय का इंतजार करना महत्वपूर्ण है। बच्ची की निजता और गरिमा का सम्मान करते हुए उसके भविष्य से जुड़ी जानकारी को भी जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

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