नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ रिलीज से पहले ही चर्चा में आ गई है। फिल्म का टीजर सामने आने के कुछ दिनों बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इसके चित्रण पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म की तत्काल समीक्षा करने की मांग की है। इस घटनाक्रम ने फिल्म की कहानी, डॉक्टरों की छवि और सिनेमाई स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
IMA की चिंता मुख्य रूप से फिल्म में चिकित्सा पेशे को दिखाने के तरीके और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा के चित्रण से जुड़ी है। एसोसिएशन का मानना है कि ऐसे विषयों को प्रस्तुत करते समय सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि फिल्मों का प्रभाव दर्शकों की सोच और किसी पेशे के प्रति उनके नजरिये पर पड़ सकता है।
19 अक्टूबर को रिलीज हुआ था फिल्म का टीजर
सनी देओल के जन्मदिन के अवसर पर 19 अक्टूबर 2026 को फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ का टीजर जारी किया गया था। टीजर में सनी देओल एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका में दिखाई देते हैं, जो अपनी बेटी की मौत के बाद जवाब तलाशने निकलता है।
कहानी में उनका सामना चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार से होता है। इसके बाद उनका किरदार सच्चाई सामने लाने की कोशिश करता है। टीजर में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले संवाद भी दिखाए गए हैं, जिनके कारण फिल्म चर्चा में आई।
फिल्म की कहानी चिकित्सा क्षेत्र में कथित अनियमितताओं को केंद्र में रखती है। हालांकि, फिल्म में दिखाए गए घटनाक्रम को पूरे चिकित्सा पेशे की वास्तविक स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता। यह एक काल्पनिक सिनेमाई कहानी है, जिसके चित्रण को लेकर अब पेशेवर संगठन ने सवाल उठाए हैं।
IMA ने अश्विनी वैष्णव से क्या मांग की?
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म की तत्काल समीक्षा करने का अनुरोध किया है। एसोसिएशन ने डॉक्टरों के चित्रण, स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा और चिकित्सा पेशे को लेकर बनने वाली सार्वजनिक धारणा पर चिंता व्यक्त की है।
IMA के अनुसार, यदि फिल्म में भ्रष्टाचार या चिकित्सा क्षेत्र की अनियमितताओं को इस तरह दिखाया जाता है कि दर्शकों के बीच पूरे पेशे को लेकर अविश्वास पैदा हो, तो इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। एसोसिएशन ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और डॉक्टरों पर जनता के भरोसे को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।
एसोसिएशन ने निष्पक्ष समीक्षा के साथ फिल्म निर्माताओं से आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर कानून के तहत फिल्म पर प्रतिबंध या अन्य उचित कार्रवाई पर विचार करने का अनुरोध भी किया गया है।
हालांकि, समीक्षा की मांग किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। किसी संभावित कार्रवाई का निर्णय संबंधित प्राधिकरण और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

डॉक्टरों के चित्रण पर क्यों बढ़ी बहस?
इस विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि फिल्मों में सामाजिक समस्याओं को किस तरह प्रस्तुत किया जाना चाहिए। चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार, गलत इलाज, अनावश्यक जांच या मरीजों के शोषण जैसे आरोप गंभीर विषय हैं। इन पर आधारित कहानियां समाज में जागरूकता बढ़ा सकती हैं, लेकिन किसी एक काल्पनिक कहानी के आधार पर पूरे पेशे के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
IMA की चिंता इसी अंतर से जुड़ी है। एसोसिएशन का कहना है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा पहले से ही चिंता का विषय है। ऐसे में फिल्मों में चिकित्सा पेशे के चित्रण का असर जनता के भरोसे और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, सिनेमा को सामाजिक समस्याओं, संस्थागत कमियों और कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने का माध्यम भी माना जाता है। इसलिए इस मामले में रचनात्मक स्वतंत्रता, सामाजिक जिम्मेदारी और पेशेवर समुदायों की चिंताओं के बीच संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा।
फिल्म में कौन-कौन आएगा नजर?
‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ का निर्देशन एम. पद्मकुमार ने किया है। फिल्म में सनी देओल के साथ रवि किशन, प्रज्ञा जायसवाल, तनुश्री चक्रवर्ती, मनीष वाधवा और टीनू आनंद सहित कई कलाकार नजर आएंगे।
फिल्म का निर्माण कमल मुकुट से जुड़ी प्रोडक्शन टीम ने किया है। यह फिल्म 20 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए निर्धारित है।
टीजर में सनी देओल का गंभीर और भावनात्मक किरदार कहानी का केंद्र है। अपनी बेटी की मौत के पीछे के सवालों का जवाब तलाशने वाला उनका पात्र धीरे-धीरे कथित अनियमितताओं की परतें खोलने की कोशिश करता है। इसी कथानक को लेकर अब फिल्म की समीक्षा की मांग उठी है।
क्या फिल्म पर प्रतिबंध लग सकता है?
फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार, IMA ने फिल्म की समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। लेकिन केवल पत्र लिखे जाने या आपत्ति जताए जाने से फिल्म पर प्रतिबंध नहीं लग जाता।
भारत में फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन से संबंधित प्रमाणन की जिम्मेदारी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की है। किसी फिल्म को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर कार्रवाई लागू कानूनों और संबंधित प्राधिकरणों की प्रक्रिया के अनुसार होती है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, फिल्म के निर्माताओं या संबंधित प्रमाणन प्राधिकरण की ओर से इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल फिल्म की समीक्षा की मांग को अंतिम निर्णय या प्रतिबंध के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।



