गोंडा (उत्तर प्रदेश) : गोंडा जनपद में राजस्व विभाग की लापरवाही पर जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा-24 के तहत लंबित मामलों में लापरवाही बरतने वाले 33 कानूनगो (राजस्व निरीक्षक) का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।
लंबित मामलों पर नहीं दिखा गंभीरता से रुझान
डीएम नेहा शर्मा ने राजस्व कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान पाया कि संबंधित कानूनगो लंबित मामलों के निस्तारण में उदासीनता बरत रहे हैं। उनकी कार्यप्रणाली में न तो कोई गंभीरता दिखी और न ही नियत समय पर काम पूरा करने की प्रतिबद्धता।
डीएम ने जताई नाराजगी, दिया सख्त संदेश
बैठक में डीएम ने स्पष्ट कहा, “जनहित से जुड़े राजस्व मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक लंबित प्रकरण का समयबद्ध समाधान किया जाए और इसकी साप्ताहिक मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित की जाए।
कानूनगो को दिया अंतिम अवसर
इस कार्रवाई के तहत जिन कानूनगो का वेतन रोका गया है, उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। साथ ही उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र के लंबित राजस्व मामलों का जल्द से जल्द निस्तारण करें, अन्यथा आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम
डीएम की इस सख्ती को प्रशासनिक हलकों में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला कदम माना जा रहा है। इससे न केवल अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार की उम्मीद है, बल्कि आम जनता को भी समय पर न्याय और समाधान मिलने की संभावना बढ़ेगी।
निष्कर्ष:
गोंडा जिलाधिकारी नेहा शर्मा की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि जनता से जुड़े मामलों में लापरवाही का कोई स्थान नहीं है। प्रशासन अब नतीजे चाहता है, और इसके लिए उत्तरदायित्व तय करना अनिवार्य है।



