गोंडा (उत्तर प्रदेश) : गोंडा जिले के परसपुर ब्लॉक स्थित नारायनपुर मर्दन गांव में एक बड़े राशन घोटाले का मामला सामने आया है। यहां कोटेदार सुनील कुमार तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2022 में मृत हो चुकीं ग्राम विकास अधिकारी गायत्री देवी के नाम पर अब तक खाद्यान्न का सत्यापन कर राशन वितरण दर्शाया है।
2022 में मृत्यु, 2025 तक फर्जी सत्यापन
ग्राम प्रधान राजाराम द्वारा मंडलायुक्त शशि भूषण लाल सुशील को दी गई शिकायत में कहा गया कि गायत्री देवी की मृत्यु 15 नवंबर 2022 को हो चुकी थी, लेकिन कोटेदार ने अप्रैल 2025 तक उन्हीं के नाम से राशन वितरण और सत्यापन दर्शाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नोडल अधिकारियों की सूची में भी अप्रैल 2025 में गायत्री देवी का नाम दर्ज है।
कम राशन देकर की गई हेराफेरी
शिकायत के अनुसार, कोटेदार सुनील तिवारी कार्डधारकों को तय मात्रा से कम राशन देकर बाक़ी का अनाज खुद गबन कर रहा था। इतना ही नहीं, वितरण प्रक्रिया के सत्यापन के लिए मृत अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर का भी इस्तेमाल किया गया।
कमिश्नर ने दिए जांच के आदेश
ग्राम प्रधान की शिकायत को गंभीर मानते हुए देवीपाटन मंडल के कमिश्नर शशि भूषण लाल सुशील ने जिला पूर्ति अधिकारी को जांच कर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह मामला लोक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार और लापरवाही का गंभीर उदाहरण बनकर उभरा है।
क्या कहता है नियम?
राशन वितरण में सत्यापन की प्रक्रिया आमतौर पर जीवित अधिकारियों या नोडल कर्मियों के हस्ताक्षर से होती है। ऐसे में किसी मृत अधिकारी के नाम और हस्ताक्षर का प्रयोग आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 के तहत दंडनीय अपराध है।
निष्कर्ष:
गोंडा के इस मामले ने दिखा दिया है कि कैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की जड़ें गहरी हैं। कोटेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से जरूरतमंदों का हक मारा जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करता है या नहीं।



