गोंडा में दुकान विवाद बना खूनी संघर्ष: पूर्व चेयरमैन ने तानी रिपीटर बंदूक, बट से फोड़ा सिर, 6 पर जानलेवा हमले का केस

गोंडा: जिले के मालवीय नगर क्षेत्र में दुकान के कब्जे को लेकर एक पुरानी रंजिश गुरुवार को खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। पीड़िता मीरा श्रीवास्तव ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके पति अम्बरीश कुमार खरे को फोन कर घर से बाहर बुलाया गया, जहां पहले से घात लगाए बैठे हमलावरों ने जानलेवा हमला किया।


पूर्व चेयरमैन पर गंभीर आरोप: सिर पर बट से वार, बंदूक तानी

मीरा श्रीवास्तव के अनुसार,

“जैसे ही मेरे पति बाहर निकले, वहां पहले से मौजूद पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रूपेश श्रीवास्तव ने उन पर रिपीटर बंदूक तान दी और बंदूक की बट से सिर पर जोरदार वार किया। साथ ही उनके साथ आए अन्य लोगों ने भी लाठी-डंडों से हमला कर दिया।”

घटना के बाद घायल अम्बरीश खरे को स्थानीय लोगों की मदद से इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।


हमलावरों में 6 लोग नामजद, गंभीर धाराओं में केस दर्ज

पुलिस ने मीरा श्रीवास्तव की तहरीर पर पूर्व चेयरमैन रूपेश श्रीवास्तव समेत 6 लोगों के खिलाफ धारा 147, 148, 323, 504, 506, 307 के तहत केस दर्ज किया है।

नामजद आरोपी हैं:

  • रूपेश श्रीवास्तव (पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष)

  • राहुल श्रीवास्तव

  • विनय वर्मा

  • दीपक अग्रहरि

  • जितेंद्र मिश्रा

  • अरुण यादव

एसएचओ कोतवाली ने बताया कि,

“घटना की जांच की जा रही है, सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयान लिए जा रहे हैं। सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।”


दुकान को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अम्बरीश खरे और रूपेश श्रीवास्तव के बीच एक दुकान के मालिकाना हक और कब्जे को लेकर वर्षों से विवाद चल रहा था। इस विवाद ने अब हिंसक रूप ले लिया है।

लोगों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप किया होता, तो शायद यह टकराव टल सकता था।


शहर में तनाव का माहौल, पुलिस सतर्क

घटना के बाद मालवीय नगर और आसपास के इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और किसी भी अनहोनी को टालने के लिए सतर्कता बरती जा रही है। पीड़ित पक्ष ने मामले में सख्त कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है।


निष्कर्ष: राजनीतिक रसूख और न्याय व्यवस्था की परीक्षा

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पर लगे गंभीर आरोपों ने स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामले को राजनीतिक दबाव से हटकर निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकें।

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