गोंडा: उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कोरोना के संभावित मामलों को लेकर अलर्ट जारी है, लेकिन गोंडा स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां पूरी तरह से अधूरी हैं। जिले के गोंडा मेडिकल कॉलेज सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोविड से निपटने के लिए बुनियादी संसाधनों की भारी कमी सामने आई है।
???? 20 बेड आरक्षित लेकिन इलाज के इंतजाम नहीं
मेडिकल कॉलेज में कोविड के लिए 20 बेड का जनरल वार्ड आरक्षित किया गया है, वहीं जिले के 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दो-दो बेड सुरक्षित किए गए हैं। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि न तो कोविड जांच किट उपलब्ध हैं और न ही पीपीई किट। मेडिकल कॉलेज का कोविड जांच केंद्र पूरी तरह से बंद पड़ा है, जहां धूल जमी हुई है और कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है।
❗ सीएमओ ने मानी कमी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रश्मि वर्मा ने पुष्टि की है कि जिले में कोविड जांच किट उपलब्ध नहीं हैं, और जो पीपीई किट थीं, वे अब एक्सपायर हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जांच किट और पीपीई किट की आपूर्ति के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। निर्देश मिलने के बाद ही खरीद की जाएगी।
???? संभावित बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट
फिलहाल गोंडा जिले में कोई भी कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने नहीं आया है, लेकिन प्रदेश के अन्य हिस्सों में केस बढ़ रहे हैं, जिससे प्रशासन सतर्क है। सीएमओ ने अपील की है कि अगर किसी को कोरोना जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल या सीएचसी में संपर्क करें।
???? स्वास्थ्य विभाग का दावा बनाम हकीकत
स्वास्थ्य विभाग भले ही अलर्ट मोड पर होने का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल विपरीत है। न जांच किट, न पीपीई किट और न ही कर्मचारियों की तैनाती—यह सब मिलकर जिला प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। कोविड की संभावित तीसरी लहर की आशंका के बीच ऐसी तैयारियां गंभीर चिंता का विषय हैं।
???? निष्कर्ष:
गोंडा जैसे जिले में कोविड जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लचर तैयारी न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि जनता की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है। जब तक जांच किट और सुरक्षा उपकरण नहीं पहुंचते, तब तक प्रशासन को जनजागरूकता, निगरानी और प्राथमिक सुविधाओं को सुनिश्चित करने की जरूरत है।



