गोंडा: गोंडा जिले में हाल ही में हुए एक लाख के इनामी बदमाश सोनू पासी के पुलिस एनकाउंटर की अब मजिस्ट्रियल जांच की जाएगी। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने इस जांच के आदेश देते हुए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) आलोक कुमार को जांच अधिकारी नामित किया है।
???? क्या था एनकाउंटर का मामला?
मामला 20 मई की रात का है जब उमरीबेगमगंज थाना क्षेत्र के सनौली मोहम्मदपुर गांव के पास पुलिस ने सोनू पासी को पकड़ने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, सोनू ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस की कार्रवाई में वह घायल हो गया। बाद में गोंडा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
???? किस अपराध में था वांछित?
सोनू पासी 24 अप्रैल को धन्नी पुरवा गांव में चोरी के दौरान 22 वर्षीय युवक शिवदीन की हत्या का मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से फरार चल रहे सोनू पर एडीजी गोरखपुर जोन द्वारा एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
???? मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश क्यों?
जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में, डीजीपी उत्तर प्रदेश के 2017 के परिपत्र के तहत यह जांच अनिवार्य है। इसीलिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) आलोक कुमार को जांच अधिकारी बनाया गया है।
???? क्या कहा प्रशासन ने?
डीएम ने स्पष्ट किया कि यह जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से की जाएगी। इस जांच में एनकाउंटर से जुड़े सभी साक्ष्य एकत्र किए जाएंगे। अगर कोई भी व्यक्ति इस घटना से जुड़ी जानकारी या सबूत देना चाहता है तो वह जांच अधिकारी से संपर्क कर सकता है। बयान देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।
???? जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी
जांच टीम एनकाउंटर से जुड़े सभी तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों का अध्ययन करेगी और रिपोर्ट सीधे जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि एनकाउंटर की प्रक्रिया न्यायसंगत थी या नहीं।
???? निष्कर्ष:
गोंडा में कुख्यात बदमाश सोनू पासी के एनकाउंटर के बाद उठे सवालों के बीच मजिस्ट्रियल जांच का फैसला प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में अहम कदम है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि क्या यह एनकाउंटर सभी नियमों और मानकों के अनुरूप था।



