गोंडा में लिपिक पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप: भाजपा विधायक ने सीएम को लिखा पत्र, प्रमुख सचिव ने दिए जांच के आदेश

गोंडा (उत्तर प्रदेश): जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा शाखा में तैनात लिपिक अनुपम पांडेय पर करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप सामने आया है। इस मामले में तरबगंज से भाजपा विधायक प्रेम नारायण पांडे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर लिपिक के खिलाफ विस्तृत जांच की मांग की है।


मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत:

विधायक प्रेम नारायण पांडे ने पत्र में कहा कि अनुपम पांडे ने शिक्षा विभाग के फंड का दुरुपयोग करते हुए बड़ी मात्रा में फर्जी भुगतान और हेराफेरी की है। उन्होंने मांग की कि मामले की गहराई से जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।


प्रमुख सचिव ने दिए जांच के निर्देश:

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा) को इस मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी गोंडा और बेसिक शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट तलब की है और कहा है कि दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


पूर्व में भी उठे थे सवाल:

सूत्रों के मुताबिक, लिपिक अनुपम पांडे के खिलाफ पूर्व में भी लेखा प्रक्रिया में अनियमितताओं और ठेकेदारों से साठगांठ के आरोप लगे थे, लेकिन कोई ठोस जांच नहीं हुई। अब विधायक द्वारा CM को सीधे पत्र भेजने से मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक तूल पकड़ लिया है।


विधायक ने क्या कहा:

विधायक प्रेम नारायण पांडे ने कहा—

“सरकार की मंशा साफ है, लेकिन कुछ भ्रष्ट कर्मचारी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।”


क्या बोले विभागीय अधिकारी:

बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और वित्तीय अभिलेखों की जांच शुरू कर दी गई है। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।


मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • लिपिक अनुपम पांडे पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप

  • भाजपा विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखी सीधी शिकायत

  • प्रमुख सचिव ने दिए जांच के निर्देश

  • पूर्व में भी लगे थे अनियमितता के आरोप

  • जल्द हो सकती है प्रशासनिक कार्रवाई


निष्कर्ष:

योगी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अब इस मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद की जा रही है। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला राज्यभर के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

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