गोंडा: जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित गायत्री पुरम के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की कथित लापरवाही से मौत हो जाने के बाद जमकर हंगामा हुआ। मृतका की पहचान 37 वर्षीय गीता मिश्रा के रूप में हुई है, जो कटरा बाजार थाना क्षेत्र के अशोकपुर बंजरिया गांव की रहने वाली थीं। महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया और स्थानीय थाने में तहरीर देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सात दिन में दो ऑपरेशन और 27 टांके: बिगड़ती गई तबीयत
परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गीता मिश्रा को बच्चेदानी से संबंधित समस्या थी, जिसके इलाज के लिए उन्हें 3 जून को इस निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि भर्ती के मात्र सात दिनों के भीतर महिला का दो बार ऑपरेशन किया गया। दूसरे ऑपरेशन में तो उनके पेट में 27 टांके लगाए गए थे। परिजनों का कहना है कि इन ऑपरेशनों के बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई, लेकिन अस्पताल प्रबंधन उन्हें बार-बार यह भरोसा दिलाता रहा कि सब ठीक हो जाएगा।
शनिवार देर रात बिगड़ी हालत, हुई मौत
शनिवार देर रात गीता मिश्रा की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई। कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही अस्पताल में मौजूद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिसर में जमकर हंगामा किया और न्याय की मांग की।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप, अस्पताल प्रबंधन का इनकार
मृतका के परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते समुचित और सही इलाज किया गया होता तो गीता की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली, लेकिन उचित सेवा नहीं दी।
वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अस्पताल के मैनेजर का कहना है, “मरीज की तबीयत पहले से ही काफी खराब थी। हमारी टीम ने इलाज में पूरी कोशिश की, लेकिन अफसोसजनक रूप से उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। हमने हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान की।”
पुलिस ने शुरू की जांच, निजी स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
नगर कोतवाली पुलिस ने परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने गोंडा जिले में निजी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उनकी कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों की मुख्य मांग है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए और जो भी दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो सके और मरीजों को सही उपचार मिल सके।



