लखनऊ नगर निगम में पार्षदों का हंगामा: ‘पार्षद पस्त, अधिकारी मस्त’ के लगे नारे, नगर आयुक्त की गैरमौजूदगी पर बिफरे जनप्रतिनिधि

लखनऊ | लखनऊ नगर निगम की जनसुनवाई बैठक मंगलवार को उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई जब नगर आयुक्त गौरव कुमार के अनुपस्थित रहने पर पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। बैठक में मौजूद पार्षदों ने जोरदार नारेबाजी की—

“पार्षद पस्त, अधिकारी मस्त!”

इस हंगामे के दौरान नगर पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा और पार्षदों के बीच तीखी बहस भी हुई।


पार्षदों ने जताई नाराजगी

जनप्रतिनिधियों का कहना था कि वे जन समस्याएं लेकर नियमित रूप से बैठक में आते हैं, लेकिन अधिकारी खासकर नगर आयुक्त की अनुपस्थिति ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का अपमान किया है। एक पार्षद ने कहा—

“हम जनता से सीधे जुड़कर समस्याएं सुनते हैं, लेकिन अधिकारी जवाबदेही से भाग रहे हैं। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”


डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का आश्वासन

मामला तूल पकड़ता देख उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को भी बयान देना पड़ा। उन्होंने कहा—

“हम पूरे मामले की जानकारी लेंगे और नगर आयुक्त से बात करेंगे। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।”

डिप्टी सीएम ने पार्षदों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।


अधिकारी बनाम जनप्रतिनिधि टकराव

पिछले कुछ समय से नगर निगम में पार्षद और अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। खासकर सफाई व्यवस्था, जल निकासी, और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर जनप्रतिनिधि लगातार शिकायतें करते आ रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा।


पार्षदों की मांगें

  • नगर आयुक्त की बैठक में नियमित उपस्थिति

  • क्षेत्रीय समस्याओं के त्वरित समाधान की रूपरेखा

  • पार्षदों को सम्मानजनक व्यवहार और सुनवाई का अधिकार


सवाल उठे प्रशासनिक जवाबदेही पर

नगर निगम जैसे संवेदनशील निकाय में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा को लेकर बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन जनप्रतिनिधियों की नहीं सुनता तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा? क्या अधिकारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति जवाबदेह हैं?

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top