गोंडा में ‘शत्रु संपत्ति’ पर 24 लाख का खेल! बैंक मैनेजर समेत 11 पर FIR, फर्जी कागजों से पास हुआ लोन?

उत्तर प्रदेश: के गोंडा जिले में शत्रु संपत्ति घोषित भूमि पर 24 लाख रुपये का लोन स्वीकृत होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस प्रकरण में बैंक मैनेजर समेत 8 नामजद और 2-3 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

नगर कोतवाली क्षेत्र के पंतनगर फोरबिशगंज निवासी फारुख अली ने नगर कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उनकी खरीदी हुई जमीन, जिसे बाद में शत्रु संपत्ति घोषित किया गया, उस पर फर्जी तरीके से 24 लाख रुपये का लोन पास करा लिया गया।

फारुख अली के मुताबिक, उन्होंने 10 दिसंबर 2020 को माधवपुर चकत्ता निवासी रघुनाथ से यह जमीन खरीदी थी। बैनामा से पहले खतौनी सहित सभी दस्तावेजों की जांच की गई थी, जिसमें रघुनाथ का नाम दर्ज था। लेकिन 17 जनवरी 2023 को जिलाधिकारी के आदेश से उक्त भूमि को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया।

शत्रु संपत्ति पर कैसे पास हुआ लोन?

आरोप है कि 5 अप्रैल 2024 को यूपी कोऑपरेटिव बैंक की बड़गांव शाखा के मैनेजर अजय कुमार और अन्य लोगों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 24 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कर दिया।

फारुख अली का कहना है कि उन्होंने कोई लोन नहीं लिया है। 29 अगस्त 2024 को तहसील से चेतावनी निकलवाने पर उन्हें पता चला कि शत्रु संपत्ति की खतौनी बंधक दिखाकर उनके खाते से 24 लाख रुपये का लोन निकाला गया है।

बैंक पैनल अधिवक्ता पर भी आरोप

शिकायत में बैंक के पैनल अधिवक्ता शिवाकांत वर्मा उर्फ पंकज वर्मा, बैंक कर्मी पवन पाल, सुशील कुमार, पवन कुमार तिवारी, राघव राम उर्फ रघु, निशांत तिवारी सहित अन्य लोगों को नामजद किया गया है।

फारुख अली के अनुसार, बैनामा के समय शिवाकांत वर्मा रघुनाथ की ओर से पैरोकार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जालसाजी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पहले जमीन का बैनामा कराया गया और बाद में उसी जमीन को बंधक दिखाकर बैंक से भारी भरकम लोन स्वीकृत करा लिया गया।

कई गांवों में लोन वितरण की आशंका

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले 18 महीनों से बैंक स्टाफ और पैनल अधिवक्ता की मिलीभगत से सदर तहसील के कई गांवों—बूढ़ादेवर, ज्ञानापुर, लक्ष्मणपुर जाट, गिर्द गोंडा समेत अन्य क्षेत्रों—में बिना स्थलीय निरीक्षण के होम लोन, वाहन लोन और अन्य ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इस पूरे प्रकरण में बड़े स्तर पर अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

नगर कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि बैंक मैनेजर अजय कुमार समेत 8 नामजद और 2-3 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच अपराध निरीक्षक सभाजीत सिंह को सौंपी गई है।

फारुख अली ने मामले की शिकायत देवीपाटन रेंज के आईजी से भी की थी, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।


शत्रु संपत्ति क्या होती है?

भारत में ‘शत्रु संपत्ति’ उस संपत्ति को कहा जाता है, जिसके मालिक भारत विभाजन या बाद के युद्धों के दौरान पाकिस्तान या चीन चले गए और वहां की नागरिकता ले ली। ऐसी संपत्तियों का प्रबंधन सरकार द्वारा किया जाता है और इन्हें निजी लेन-देन में उपयोग नहीं किया जा सकता।

गोंडा का यह मामला बैंकिंग प्रणाली और राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। शत्रु संपत्ति घोषित भूमि पर 24 लाख रुपये का लोन स्वीकृत होना साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित संगठित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। अब पुलिस जांच से ही स्पष्ट होगा कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है तथा कितनी बड़ी वित्तीय अनियमितता हुई है।

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