लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी के रंगमंच पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बाल कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को भारतीय रंगमंच की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया। नागरी नाटक मंडली, वाराणसी और भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ की संयुक्त प्रस्तुति में नाट्यशास्त्र की उत्पत्ति और उसके महत्व को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। कलाकारों के दमदार अभिनय और भावपूर्ण अभिव्यक्ति पर पूरा सभागार बार-बार तालियों से गूंज उठा।

नाट्यशास्त्र की उत्पत्ति को किया मंच पर सजीव
प्रस्तुति के दौरान दर्शाया गया कि किस प्रकार ब्रह्मा ने चारों वेदों के सार से नाट्यवेद की रचना की और महर्षि भरतमुनि ने उसे लोककल्याण के उद्देश्य से समाज तक पहुंचाया। संगीत, नृत्य, अभिनय और संवादों का सुंदर समन्वय दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में सफल रहा। पूरी प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन तालियों के साथ किया।
सुमन पाठक के निर्देशन में दिखी बाल कलाकारों की प्रतिभा
नाटक का निर्देशन सुश्री सुमन पाठक ने किया। उनके कुशल निर्देशन में बाल कलाकारों ने अपने-अपने पात्रों को पूरी तन्मयता और आत्मविश्वास के साथ मंच पर जीवंत किया। कलाकारों में गुरु, दीपिका, अमृत, अनायरा, जय वर्धन, नैतिक, वर्ष रमन, सबी शर्मा, सत्यम, श्लोक, ईशान, लक्ष्य और अर्नव ने अपनी अभिनय प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीत लिया।
मंच सज्जा ने बढ़ाई प्रस्तुति की भव्यता
प्रस्तुति को आकर्षक बनाने में दीपक यादव, यश वर्धन दूबे और निखिल की मंच सज्जा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी रचनात्मक सज्जा ने कार्यक्रम की भव्यता को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

भारतीय संस्कृति से जोड़ने का बना प्रभावी माध्यम
कार्यक्रम के समापन पर दर्शकों ने कलाकारों, निर्देशिका और पूरी टीम की सराहना की। उपस्थित लोगों का कहना था कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, साहित्य और रंगमंच की समृद्ध विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। यह प्रस्तुति केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन का प्रभावी संदेश भी देती नजर आई।



