Asian Games 2026 Wrestling: 6 मेडल के बाद भी खुश नहीं बृजभूषण सिंह! महिलाओं के प्रदर्शन पर उठाया सवाल, बोले- अभी बहुत काम बाकी

नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय कुश्ती का अभियान छह पदकों के साथ खत्म हुआ, लेकिन इस प्रदर्शन ने पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को पूरी तरह संतुष्ट नहीं किया। उनका कहना है कि भारतीय कुश्ती से उन्हें इससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। खास तौर पर उन्होंने महिला पहलवानों के प्रदर्शन को उम्मीद के मुताबिक नहीं बताया है।

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि एशियन गेम्स से पहले उन्हें भारतीय पहलवानों से कम से कम आठ पदकों की उम्मीद थी। उनके अनुमान में तीन स्वर्ण समेत कुल आठ पदक आने की संभावना थी, लेकिन भारतीय टीम छह पदकों तक ही पहुंच सकी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि उपलब्धि को कम करके नहीं देखा जा सकता और लंबे अंतराल के बाद भारतीय कुश्ती ने एशियाई स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है।

छह पदक आए, लेकिन उम्मीद थी आठ की

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवानों ने पुरुष और महिला वर्ग को मिलाकर छह पदक हासिल किए। पुरुष फ्रीस्टाइल में अमन सहरावत ने 57 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि सुजीत कलकल ने 65 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण अपने नाम किया।

इसके अलावा नितेश सिवाच ने ग्रीको-रोमन के 97 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक हासिल किया। महिला वर्ग में अंतिम पंघाल ने 53 किलोग्राम फ्रीस्टाइल में रजत पदक जीता। दीपक पूनिया और सुनील कुमार ने अपने-अपने वर्ग में कांस्य पदक हासिल किए। इस तरह भारतीय कुश्ती के खाते में कुल छह पदक आए।

महिला पहलवानों को लेकर क्या बोले बृजभूषण?

बृजभूषण शरण सिंह का सबसे ज्यादा ध्यान महिला पहलवानों के प्रदर्शन पर रहा। उन्होंने कहा कि महिलाओं का प्रदर्शन उनकी उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। उनका मानना है कि भारतीय कुश्ती को आगे बढ़ाने के लिए महिला वर्ग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी।

उनके बयान के मुताबिक, एशियन गेम्स से पहले पदकों की संख्या को लेकर जो अनुमान लगाया गया था, वह पूरा नहीं हुआ। इसके बावजूद उन्होंने छह पदकों को भारतीय कुश्ती के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना। उनके अनुसार, 1966 के बाद एशियन गेम्स में भारतीय कुश्ती के लिए यह एक उल्लेखनीय प्रदर्शन है।

पिछले कुछ वर्षों की उथल-पुथल का भी जिक्र

बृजभूषण ने भारतीय कुश्ती के पिछले दो-तीन वर्षों के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान कुश्ती के क्षेत्र में काफी उथल-पुथल रही, जिसका असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ा। उनके अनुसार, कई अच्छे खिलाड़ी उस स्तर का प्रदर्शन दोहराने में सफल नहीं हो सके, जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल सरकार, खेल संघ और खिलाड़ियों के बीच बेहतर सामंजस्य दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि इस सकारात्मक माहौल को आगे भी बनाए रखने की जरूरत है, ताकि भारतीय कुश्ती अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर सके।

अब नजर आगे की तैयारी पर

एशियन गेम्स में छह पदक जीतने के बाद भारतीय कुश्ती के सामने अगली बड़ी चुनौती इन प्रदर्शन को भविष्य की प्रतियोगिताओं में बरकरार रखने की होगी। बृजभूषण ने कहा कि अब कुश्ती पर और काम करने की आवश्यकता है और कोशिश होनी चाहिए कि एशियन गेम्स में मिले छह पदकों की सफलता को ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भी दोहराया जा सके।

इस बीच भारतीय कुश्ती में प्रशासन और खिलाड़ियों के बीच पिछले वर्षों में रहे विवादों की चर्चा भी एक बार फिर सामने आई है। हाल के वर्षों में भारतीय कुश्ती व्यवस्था में कई बदलाव हुए हैं और इस दौरान राष्ट्रीय महासंघ के संचालन को लेकर भी काफी उठापटक देखने को मिली थी।

राजनीतिक भविष्य पर भी दिया जवाब

बृजभूषण शरण सिंह ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वह 2027 में होने वाला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि अगले संसदीय चुनाव को लेकर उन्होंने फिलहाल कोई स्पष्ट फैसला सार्वजनिक नहीं किया है और कहा कि इस बारे में समय आने पर निर्णय लिया जाएगा।

एशियन गेम्स में छह पदकों के बाद अब भारतीय कुश्ती के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन उपलब्धियों को अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर और मजबूत किया जा सकेगा। खासकर महिला कुश्ती में प्रदर्शन सुधारना भारतीय टीम की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। बृजभूषण के बयान ने इसी मुद्दे पर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।

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