गोंडा, उत्तर प्रदेश :
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की तहसील तरबगंज में स्थित पौराणिक मां वाराही देवी मंदिर, जिसे 51 शक्तिपीठों में एक माना जाता है, अब नवजीवन की ओर अग्रसर है। जिलाधिकारी नेहा शर्मा की पहल और जनभागीदारी से इस ऐतिहासिक मंदिर परिसर का स्वरूप तीव्र गति से बदला जा रहा है।
कायाकल्प का पहला चरण पूरा
पहले चरण में मंदिर तक जाने वाले मार्ग से अतिक्रमण हटाकर उसे साफ-सुथरा किया गया। 53 अस्थायी दुकानों को हटाकर उन्हें पुनः व्यवस्थित किया गया। इसके अलावा, मंदिर परिसर के सामने एक विशाल कंपाउंड का निर्माण किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन और आवाजाही में काफी राहत मिली है।
दूसरे चरण में सौंदर्यीकरण और जनसुविधाएं
वर्तमान में कायाकल्प योजना का दूसरा चरण प्रगति पर है, जिसमें मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधा, वृक्षारोपण और अन्य जनसुविधाएं विकसित की जा रही हैं। जिलाधिकारी नेहा शर्मा के निर्देशन में यह कार्य तेजी से चल रहा है और स्थानीय लोगों का सहयोग भी सराहनीय है।
शक्तिपीठ के रूप में मान्यता और आस्था का केंद्र
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह स्थान मां सती के दांतों के गिरने का स्थल है। यहां अब भी दो गहरे छिद्र मौजूद हैं, जिनकी गहराई आज तक मापी नहीं जा सकी है। यह मंदिर विशेष रूप से नेत्र रोगियों के बीच आस्था का केंद्र माना जाता है।
डीएम ने जताई भावनात्मक प्रतिबद्धता
जिलाधिकारी ने कहा,
“यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। इसे आदर्श धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का हमारा प्रयास पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी है।”
धार्मिक पर्यटन और सामाजिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
मां वाराही देवी मंदिर के कायाकल्प से जहां धार्मिक पर्यटन को गति मिलेगी, वहीं प्रशासन और आमजन के सामूहिक सहयोग की एक शानदार मिसाल भी स्थापित हो रही है। यह योजना क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्रदान करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
निष्कर्ष:
मां वाराही देवी धाम का पुनरुद्धार कार्य धार्मिक आस्था, प्रशासनिक संकल्प और जनसहयोग का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है। यह स्थान न सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनेगा, बल्कि गोंडा जिले के लिए गौरव का केंद्र भी बनेगा।



