-
गोंडा, उत्तर प्रदेश : गोंडा जिले के खोडारे थाना क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जो काफी हद तक अलीगढ़ की चर्चित सास-दामाद प्रेमकहानी जैसा है। यहां एक 44 वर्षीय महिला उषा देवी, अपनी ही बेटी के होने वाले दूल्हे रामस्वरूप (25 वर्षीय) के साथ बेटी की शादी से 13 दिन पहले फरार हो गई।
कैसे शुरू हुआ मामला?
उषा देवी की बेटी की शादी 9 मई को तय है। पहले यह शादी रामस्वरूप नामक युवक से तय की गई थी, जो बस्ती जिले के दुबौलिया थाना क्षेत्र का निवासी है। रामस्वरूप ने अक्टूबर 2024 में उषा की बेटी को फोन गिफ्ट किया और कुछ समय तक बातचीत होती रही। लेकिन दिसंबर 2024 में रामस्वरूप ने यह कहकर रिश्ता तोड़ दिया कि लड़की सही नहीं है। इसके बाद परिवार ने फरवरी में बेटी की शादी दूसरी जगह तय कर दी।
सास और दामाद के बीच बढ़ी नजदीकियां
रिश्ता टूटने के बावजूद रामस्वरूप और उषा देवी में बातचीत जारी रही, जो धीरे-धीरे घंटों तक चलने लगी। आखिरकार, 25 अप्रैल की सुबह उषा देवी घर से बिना बताए निकल गईं। तीन दिन की खोजबीन के बाद 27 अप्रैल को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई।
पुलिस की तेजी से हुई बरामदगी
गोंडा पुलिस ने बस्ती जिले की पुलिस से संपर्क कर कार्रवाई शुरू की। दुबौलिया पुलिस ने दोनों को बरामद कर लिया और मंगलवार को गोंडा पुलिस के हवाले कर दिया। महिला की काउंसलिंग के बाद वह अपने पति के साथ वापस घर भेज दी गई।
क्या बोली महिला?
उषा देवी ने बताया, “मेरा मानसिक संतुलन ठीक नहीं था, इसलिए मैं रामस्वरूप के साथ चली गई थी। मैं कोई जेवर या पैसा लेकर नहीं गई थी। अब मैं अपने पति किशन के साथ ही रहूंगी।”
वहीं पति किशन का कहना है, “पत्नी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। अब वह घर वापस आ गई है और बेटी की शादी 9 मई को तय समय पर होगी।”
पुलिस का बयान:
अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) मनोज कुमार रावत ने बताया, “महिला को बस्ती से बरामद किया गया। वह रामस्वरूप के साथ स्वेच्छा से गई थी, लेकिन अब पति के साथ रहना चाहती है। महिला को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।”
अलीगढ़ जैसा ही मामला:
इससे पहले अलीगढ़ जिले में भी सास और दामाद के प्रेम संबंधों का मामला सामने आया था, जहां बेटी की शादी से 10 दिन पहले सास अपने होने वाले दामाद के साथ भाग गई थी। दोनों ने थाने में सरेंडर किया, लेकिन गांववालों के विरोध के चलते उन्हें गांव छोड़ना पड़ा।
निष्कर्ष:
गोंडा और अलीगढ़ जैसे मामले यह दर्शाते हैं कि समाज में रिश्तों की परिभाषाएं तेजी से बदल रही हैं। ऐसे मामलों में परिवारों की सामाजिक स्थिति, मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों की समझ को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।



