बस्ती (उत्तर प्रदेश) : अयोध्या धाम से निकली 84 कोसी परिक्रमा अब दिवाकर नगर बाजार पहुंच गई है। इस धर्मयात्रा में सैकड़ों साधु-संत शामिल हैं, जो गया दास महाराज की अगुआई में पैदल यात्रा कर रहे हैं। सोमवार की सुबह 7 बजे परिक्रमा खैरा वृंदावन से आरंभ हुई थी, और दोपहर 2 बजे तक यह बखरिहा गांव में विश्राम के लिए पहुंचेगी।
धार्मिक उल्लास और ग्रामीणों का पारंपरिक स्वागत
दिवाकर नगर में साधु-संतों के पहुंचने से पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बन गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से इनका स्वागत किया। फूल-मालाओं, शंख-घंटियों, और मंगल ध्वनि के साथ साधु-संतों का अभिनंदन किया गया।
स्थानीय लोगों ने भोजन और जलपान की व्यवस्था भी पहले से ही कर रखी थी।
84 कोसी परिक्रमा का धार्मिक महत्व
84 कोसी परिक्रमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह यात्रा भगवान श्रीराम की अयोध्या नगरी की परिधि में स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों की परिक्रमा करते हुए सम्पन्न होती है। यह परिक्रमा करीब 275 किलोमीटर की होती है और इसमें विभिन्न पड़ावों पर साधु-संत रुकते हैं।
गया दास महाराज के नेतृत्व में अनुशासित यात्रा
इस पवित्र यात्रा का नेतृत्व कर रहे गया दास महाराज ने बताया कि यह परिक्रमा धर्म जागरण और लोक कल्याण के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों के सहयोग की प्रशंसा की और कहा कि “इस यात्रा से समाज में भक्ति, सेवा और समर्पण की भावना और मजबूत होती है।”
अगला पड़ाव: बखरिहा गांव में होगा विश्राम
दोपहर तक साधु-संतों का जत्था बखरिहा गांव पहुंचेगा, जहां परिक्रमा का अगला पड़ाव होगा। वहां भी ग्रामीणों द्वारा भव्य स्वागत की तैयारियां की जा चुकी हैं। गांव में ठहरने, भोजन, जल और विश्राम की विशेष व्यवस्था की गई है।
निष्कर्ष:
84 कोसी परिक्रमा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को जोड़ने वाला आध्यात्मिक पर्व है। दिवाकर नगर से लेकर बखरिहा तक की इस यात्रा में दिखा आस्था, सेवा और श्रद्धा का संगम, जो भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।



