गोंडा (उत्तर प्रदेश) : जिले में राजस्व कार्यों की पारदर्शिता और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को लेकर जिलाधिकारी नेहा शर्मा लगातार सख्त रवैया अपना रही हैं। इसी क्रम में अविवादित वरासत के आवेदन पत्रों के निस्तारण में लापरवाही बरतने पर तीन लेखपालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
समीक्षा बैठक में खुला मामला, डीएम ने जताई नाराजगी
जिलाधिकारी नेहा शर्मा की अध्यक्षता में हुई राजस्व कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई अविवादित वरासत प्रकरण लम्बे समय से लंबित हैं। जब इन मामलों की तह तक जांच की गई तो यह सामने आया कि संबंधित लेखपालों ने जानबूझकर प्रकरणों का निस्तारण नहीं किया, जिससे आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
किन लेखपालों पर गिरी गाज
सूत्रों के अनुसार जिन लेखपालों पर कार्रवाई हुई है, उनमें हरख, कर्नलगंज और तरबगंज तहसीलों के राजस्वकर्मी शामिल हैं। जिलाधिकारी ने साफ कहा है कि जनता की शिकायतों और राजस्व मामलों में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम ने दी चेतावनी, जवाबदेही तय होगी
जिलाधिकारी ने कहा, “राजस्व कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने आगे निर्देश दिया कि जिन प्रकरणों में देरी हुई है, उन्हें तुरंत प्राथमिकता से निस्तारित किया जाए और संबंधित तहसीलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
जनता को मिलेगा त्वरित न्याय
इस कार्रवाई से जिले भर के राजस्व कर्मियों को एक कड़ा संदेश गया है कि कार्य में कोताही बरतने वालों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आम जनता को भी यह भरोसा मिलेगा कि उनकी शिकायतों और आवेदन पत्रों पर तेजी से कार्य किया जाएगा।
निष्कर्ष:
गोंडा प्रशासन की यह पहल न सिर्फ प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि इससे आम जनता को न्याय मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे अन्य अधिकारी भी अपने दायित्वों को गंभीरता से निभाएंगे।



