उत्तर प्रदेश टीबी उन्मूलन की ओर निर्णायक कदम: इलाज में 94% सफलता, 6.81 लाख मरीजों का हुआ पंजीकरण

उत्तर प्रदेश, भारत के सबसे बड़े जनसंख्या वाले राज्य के रूप में, राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत टीबी मुक्त प्रदेश की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। स्वस्थ नागरिकों को राष्ट्र की नींव मानते हुए, प्रदेश सरकार ने जाँच, इलाज और पोषण सहायता के माध्यम से क्षय रोग के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।


प्रयोगशालाओं और जाँच सुविधाओं का विस्तार

प्रदेश में 926 नेट मशीनें और 14 कल्चर डीएसटी लैब्स के माध्यम से टीबी मरीजों को निःशुल्क जाँच की सुविधा मिल रही है। 25 नोडल और 56 जनपदीय ड्रग रेजिस्टेंट टीबी सेंटरों से दवा-प्रतिरोधी मामलों का सफल इलाज किया जा रहा है। विशेष रूप से एमडीआर/एक्सडीआर मामलों के लिए बीडाक्यूलीन और डिलामिनिड आधारित उपचार उपलब्ध हैं।


टीबी की पहचान और इलाज में बड़ी प्रगति

वर्ष 2024 के एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान में 2.45 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 90,000 नए मरीजों की पहचान कर इलाज शुरू किया गया। इसी अवधि में 15,321 मरीजों का डायग्नोसिस कर उनका इलाज सुनिश्चित किया गया।


सम्मान और मान्यता

भारत सरकार ने विश्व क्षय रोग दिवस 2023 पर 7 जिलों को कांस्य पदक और 4 जिलों को रजत पदक से सम्मानित किया:

  • कांस्य पदक: हापुड़, कौशांबी, संत रविदास नगर, शामली, बलरामपुर, उन्नाव, सोनभद्र

  • रजत पदक: जालौन, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, पीलीभीत


नवाचार और समन्वय

  • डिफिकल्ट-टू-ट्रीट टीबी क्लीनिक: जून 2021 से जटिल मामलों की वर्चुअल चर्चा कर समाधान सुनिश्चित।

  • निक्षय पोर्टल: अब तक 3.53 लाख टीबी रोगियों को गोद लिया गया है।

  • डाक विभाग से अनुबंध: नमूनों की शीघ्रता से ट्रांसपोर्ट सुनिश्चित किया गया है।

  • आरटीपीएम इकाइयाँ: आगरा, लखनऊ, बरेली, गोरखपुर, वाराणसी से समीक्षा और निगरानी।


निक्षय पोषण योजना और वित्तीय सहायता

नवम्बर 2024 से, टीबी मरीजों को ₹1,000/माह की वित्तीय सहायता दी जा रही है। 17 फरवरी 2025 तक 28.31 लाख मरीजों को ₹820.32 करोड़ का भुगतान किया गया है। मरीजों की एचआईवी (90%) और मधुमेह (97%) की स्थिति की पहचान भी सुनिश्चित की गई है।


इलाज की सफलता दर में ऐतिहासिक सुधार

वर्ष 2017 में जहाँ इलाज की सफलता दर मात्र 29% थी, वह 2024 में बढ़कर 94% हो गई है। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा पद्धति की सफलता है, बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है।


निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश टीबी उन्मूलन की दिशा में एक उदाहरण बनता जा रहा है। निक्षय दिवस, सामाजिक भागीदारी, आधुनिक तकनीक, और राज्य स्तरीय सहयोग के बल पर यह संभव हो पाया है। यदि यही गति बनी रही, तो प्रदेश जल्द ही टीबी मुक्त बनने की ओर एक ऐतिहासिक मिसाल कायम करेगा।

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