गोंडा (उत्तर प्रदेश): गोंडा में शिक्षा माफियाओं की मनमानी के खिलाफ एक अनोखा और प्रतीकात्मक प्रदर्शन देखने को मिला। राष्ट्रीय छात्र पंचायत के कार्यकर्ताओं ने डीएम कार्यालय के बाहर मच्छरदानी में बैठकर प्रदर्शन करते हुए निजी स्कूलों द्वारा वसूली जा रही मनमानी फीस के खिलाफ आवाज उठाई।
प्रदर्शन का प्रतीकात्मक संदेश: शिक्षा माफिया = मच्छर
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर लिए हुए कहा,
“निजी स्कूल मच्छरों की तरह गरीब माता-पिता का खून चूस रहे हैं। सरकार को तुरंत फीस रेगुलेशन बिल लागू कर इस लूट को रोकना चाहिए।”
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता मच्छरदानी में बैठकर पढ़ाई का नाटक करते नजर आए, जिससे उन्होंने दिखाया कि आज की शिक्षा व्यवस्था में छात्र और अभिभावक किस कदर घुटन और शोषण का शिकार हैं।
मांगें और चेतावनी
छात्र नेताओं ने कहा कि यदि फीस नियंत्रण बिल को उत्तर प्रदेश में जल्द लागू नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने शिक्षा को व्यापार बना देने वाली व्यवस्था को ‘शोषण आधारित मॉडल’ बताया और शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में लागू करने की बात दोहराई।
प्रशासन से ज्ञापन सौंपा
प्रदर्शन के बाद छात्रों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा, जिसमें निजी स्कूलों की फीस को रेगुलेट करने, अनिवार्य शुल्क ढांचे को तय करने और वार्षिक फीस वृद्धि पर रोक लगाने की मांग की गई।
स्थानीय जनता का समर्थन भी मिला
इस प्रदर्शन को देखते हुए राहगीरों और स्थानीय नागरिकों ने भी छात्रों की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की फीस आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है और इसे लेकर शासन को सख्ती से कदम उठाने चाहिए।
निष्कर्ष:
गोंडा में मच्छरदानी प्रदर्शन एक सृजनात्मक और प्रभावशाली विरोध के रूप में सामने आया है, जिसने शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त अव्यवस्थाओं और शोषण की ओर जन और प्रशासन का ध्यान खींचा है। अब देखना यह होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर कितना और कितना जल्दी अमल करती है।



