राजा आनंद सिंह की तेरहवीं पर भोज नहीं, गरीब बेटियों की शादी होगी: राजा भैया ने सेवा-संकल्प को बताया सच्ची श्रद्धांजलि

गोंडा | उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह (राजा भैया) ने अपने पिता और पूर्व कैबिनेट मंत्री राजा आनंद सिंह की तेरहवीं पर पारंपरिक भोज न कराने का निर्णय लिया है। इसके स्थान पर 18 जुलाई को एक सेवा संकल्प श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की सामूहिक विवाह कराए जाएंगे।


समाज सेवा को बताया पिता को सच्ची श्रद्धांजलि

राजा भैया ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि—

“वेद, पुराण और रामायण सभी में सेवा और परोपकार को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बताया गया है। हम अपने पूज्य पिताजी को श्रद्धांजलि भोज से नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा करके देंगे। यही उनके जीवन मूल्यों के अनुरूप है।”

उन्होंने बताया कि इस सेवा-संकल्प कार्यक्रम की शुरुआत 18 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे मनकापुर कोट से की जाएगी। इस दौरान न केवल सामूहिक विवाह होंगे, बल्कि परिवारों को आवश्यक सामग्री भी प्रदान की जाएगी।


भोज नहीं, मदद का संदेश

गौरतलब है कि आमतौर पर तेरहवीं पर विशाल भोज का आयोजन परंपरा में शामिल होता है, लेकिन राजा भैया ने इस परंपरा से हटकर सेवा और जनकल्याण का रास्ता चुना है। यह फैसला न केवल अनुकरणीय है बल्कि समाज के उन परिवारों के लिए एक राहत है, जो अपनी बेटियों की शादी आर्थिक तंगी के कारण नहीं कर पा रहे थे।


पूरे प्रदेश में हो रही सराहना

राजा भैया के इस निर्णय की प्रशंसा सिर्फ गोंडा में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में हो रही है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और आमजन ने इस पहल को “समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाला कदम” करार दिया है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति द्वारा किया गया यह मानवीय निर्णय आने वाले समय में दूसरों को भी इस दिशा में सोचने के लिए प्रेरित कर सकता है।


पिता की स्मृति में सेवा का व्रत

राजा भैया ने यह भी स्पष्ट किया कि राजा आनंद सिंह की स्मृति को जनआदर्श के रूप में जीवित रखने के लिए हर साल ऐसे ही सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उनका मानना है कि—

“सच्ची श्रद्धांजलि वो नहीं, जो सिर्फ रस्म बनकर रह जाए, बल्कि वो है जो किसी जरूरतमंद के जीवन में बदलाव लाए।”


निष्कर्ष:

राजा भैया का यह निर्णय केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज सेवा की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है। तेरहवीं पर भोज न करके जरूरतमंद बेटियों की शादी कराना एक ऐसा कदम है, जो समाज को नई सोच और दिशा देने वाला है।

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