गोंडा, उत्तर प्रदेश।
देवीपाटन मंडल के आयुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने बुधवार को गोंडा विकास भवन और कलेक्ट्रेट कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान 17 अधिकारी और 42 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
🏢 निरीक्षण के दौरान खुले गैरहाजिरी के राज
कमिश्नर ने सबसे पहले विकास भवन में स्थित विभिन्न विभागीय कार्यालयों का निरीक्षण किया। मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी सहित कई विभागों के कर्मचारी अपनी सीटों से गायब मिले।
आयुक्त ने कहा:
“शासन के निर्देश पर जनता को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता है। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों की गैरहाजिरी निंदनीय है।”
📝 सभी को जारी हुआ स्पष्टीकरण पत्र
निरीक्षण के बाद सभी अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्टीकरण पत्र जारी किया गया है। कमिश्नर ने संबंधित विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि
-
प्रत्येक की उपस्थिति रजिस्टर से मिलान किया जाए।
-
जवाब न देने या असंतोषजनक जवाब देने पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
📌 मुख्य बिंदु:
-
कुल 59 कर्मचारी अनुपस्थित, जिनमें
-
17 अधिकारी
-
42 तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं।
-
-
निरीक्षण सुबह कार्यालय खुलने के 15 मिनट बाद किया गया।
-
कई विभागों में फाइलों का ढेर और रखरखाव में भी अनियमितताएं पाई गईं।
📣 जनता से जुड़ी सेवाओं में भी लापरवाही
जिन विभागों में लापरवाही देखी गई, उनमें समाज कल्याण, मनरेगा, ग्रामीण विकास, खाद्य एवं रसद, कृषि, बाल विकास एवं शिक्षा विभाग शामिल हैं। ये सभी जनता से सीधे तौर पर जुड़े विभाग हैं, जहां उपस्थिति और तत्परता अत्यंत आवश्यक है।
📌 निष्कर्ष:
गोंडा जिले में कमिश्नर के औचक निरीक्षण ने सरकारी कार्यालयों की लापरवाही को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रशासन कितना सख्त रुख अपनाता है। यह घटना एक बार फिर सवाल उठाती है कि क्या जनता को समय पर सेवाएं देने की प्रशासनिक मंशा धरातल पर उतर रही है या नहीं।

