गोंडा। उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा अनिवार्यता के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। गोंडा जिले में दो प्रमुख शिक्षक संगठनों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी टीईटी अनिवार्यता आदेश को तत्काल प्रभाव से खत्म किया जाए।
???? प्रदर्शन की पृष्ठभूमि:
उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक पिछले लंबे समय से टीईटी (टीचिंग एलिजिबिलिटी टेस्ट) पास करना अनिवार्य किए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में अन्याय और नौकरियों पर संकट पैदा हो गया है।
???????? एडीएम को सौंपा ज्ञापन:
गोंडा में शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एडीएम आलोक कुमार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने स्पष्ट किया कि टीईटी अनिवार्यता से अनेक योग्य शिक्षक नौकरी से वंचित हो रहे हैं, जबकि उनका अनुभव और सेवा वर्षों से क्षेत्र में प्रमाणित है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस फैसले को पुनर्विचार किया जाए ताकि शिक्षा व्यवस्था में समुचित सुधार हो।
???? शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया:
प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने कहा, “हम वर्षों से समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। लेकिन बिना उचित समझ-बूझ के लगाए गए टीईटी अनिवार्यता के नियम से न केवल भविष्य की पीढ़ी प्रभावित होगी, बल्कि लाखों शिक्षकों की नौकरी भी खतरे में पड़ जाएगी।”
⚖️ सरकार और न्यायालय का रुख:
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में टीईटी अनिवार्यता का आदेश जारी किया था, जिसे लेकर शिक्षक संगठनों ने विरोध जताया था। अब प्रशासन को चार सप्ताह में ज्ञापन पर कार्रवाई करते हुए न्यायसंगत उत्तर देना होगा।
???? महत्व:
यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शिक्षक संगठनों की मांग सरकार और न्यायपालिका दोनों के लिए एक चुनौती बन गई है।



