गोंडा: गोंडा जिले में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों ने वेतन और बोनस न मिलने से नाराज होकर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया।
अध्यापकों का कहना है कि अक्टूबर माह का वेतन अब तक जारी नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
इस विरोध के दौरान शिक्षकों ने स्कूलों में पढ़ाई तो जारी रखी, लेकिन हाथों पर काली पट्टी बांधकर प्रशासन और वित्त विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई।
???? प्रभारी वित्त अधिकारी की गैरमौजूदगी से फंसे वेतन बिल
जानकारी के अनुसार, प्रभारी वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक) गिरीश चंद्र बीते दिनों से मेडिकल लीव पर हैं, जिसके चलते वेतन बिल पास नहीं हो पा रहा है।
वित्त विभाग की लापरवाही से हजारों शिक्षकों का वेतन पिछले महीने से लंबित है।
अध्यापकों का आरोप है कि वित्त एवं लेखा विभाग में 10 से 15 वर्षों से तैनात पटल लिपिकों की मनमानी के कारण भुगतान प्रक्रिया ठप है।
???? शिक्षकों ने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर उठाई आवाज
विरोध कर रहे शिक्षकों ने वित्त विभाग में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और जमे हुए कर्मचारियों के तबादले की मांग की।
गोंडा अटेवा शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष अमर यादव, शिक्षक संघ समिति के संयोजक सतीश पांडेय और सह-संयोजक गौरव पांडेय ने चेतावनी दी—
“अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।”
उन्होंने कहा कि दीपावली के दौरान बोनस न मिलने से शिक्षकों को कर्ज लेकर त्योहार मनाना पड़ा, और अब वेतन न मिलने से स्कूल तक जाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है।
???? “वित्त विभाग में बाबुओं पर कई भ्रष्टाचार के केस” – शिक्षक संगठन
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष अनूप सिंह ने बताया कि
“वित्त एवं लेखा विभाग में तैनात कई बाबुओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के केस दर्ज हैं,
फिर भी उनका तबादला नहीं किया जा रहा। यही वजह है कि विभाग में पारदर्शिता नहीं है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार भ्रष्टाचार के कारण कोई स्थायी वित्त एवं लेखाधिकारी नियुक्त नहीं हो रहा, जिससे शिक्षकों की परेशानियाँ बढ़ती जा रही हैं।
संगठन ने सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।



