गेस्ट ऑफ ऑनर: वैज्ञानिक अनिल कुमार ने अपने संबोधन में बताया कि भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में ISRO का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि—
“जिस सैटेलाइट पर NASA 12,000 करोड़ रुपए खर्च करता है, वही सैटेलाइट ISRO ने मात्र 1,000 करोड़ में बना दिया। यह भारतीय वैज्ञानिक क्षमता और तकनीक का प्रमाण है।”
उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में स्पेस टेक्नोलॉजी की भूमिका तेजी से बढ़ रही है और ISRO युवाओं को सबसे अच्छी करियर अवसर और उच्चतम सैलरी दे रहा है।
अनिल कुमार ने बताया—
-
ISRO का सैलरी पैकेज सेंट्रल गवर्नमेंट से लगभग 40% ज्यादा है।
-
ISRO की शुरुआत 1962 में हुई थी और 1969 में महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की अगुआई में इसकी नींव रखी गई।
“इंटरनेट बंद हो जाए तो पूरा देश रुक जाता है”—अनिल कुमार
उन्होंने डिजिटल दुनिया पर बढ़ती निर्भरता का उदाहरण देते हुए कहा—
“आज अगर इंटरनेट थोड़ी देर के लिए बंद हो जाए, तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। नेपाल में हुए हालिया प्रोटेस्ट का एक कारण भी इंटरनेट ब्लॉकेज था। ट्रेनों से लेकर फ्लाइट और खाने के ट्रांसपोर्ट तक सब रुक जाता है।”
उन्होंने युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और तकनीकी क्षेत्र में अवसरों को अपनाने की सलाह दी।
मुख्य अतिथि प्रो. संजीव मिश्रा का प्रेरक संबोधन
अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. संजीव मिश्रा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा—
“इंजीनियरिंग प्रोफेशन में मेडिकल से ज्यादा विकल्प हैं। मेडिकल क्षेत्र में भारत अभी भी 70% डिवाइस विदेशों से मंगाता है। यहां इनोवेशन की बेहद जरूरत है। युवा यदि इस दिशा में काम करें तो सफलता निश्चित है।”
उन्होंने मेधावियों से कहा—
“हौसला रखो, उड़ान अभी बाकी है।”
दीक्षांत समारोह में छाई खुशियां—2455 छात्रों को उपाधि
दीक्षांत समारोह में मेधावियों को मंच पर बुलाकर डिग्री प्रदान की गई।
-
34 छात्रों को पीएचडी,
-
1257 को पीजी,
-
830 को यूजी, और
-
334 को डिप्लोमा
डिग्रियां दी गईं।
उपाधि प्राप्त कर छात्रों और उनके परिजनों के चेहरों पर खुशी देखते ही बन रही थी।



