वजीरगंज में पराली जलाने पर प्रशासन सख्त: नियम के बावजूद खेतों में लगी आग, कार्रवाई के निर्देश

गोंडा: जिले के वजीरगंज क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जबकि प्रशासन ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। शुक्रवार शाम कई खेतों में पराली जलती दिखाई दी, जिससे इलाके में घना धुआं फैल गया और वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई किसानों ने कटाई के बाद खेत साफ करने के लिए पराली में आग लगा दी। इससे खेतों के आसपास धुएं का गुबार उठता रहा। प्रशासन की सख्त हिदायतों और जागरूकता अभियानों के बावजूद पराली जलाने की यह प्रवृत्ति चिंता का विषय बनी हुई है।

कृषि विशेषज्ञ मनमोहन यादव ने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा क्षमता को भारी नुकसान पहुंचता है। मिट्टी में मौजूद जैविक तत्व नष्ट हो जाते हैं और दीर्घकाल में फसल उत्पादन भी प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि धुआं स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और दमा, सांस की बीमारियों समेत कई समस्याएं बढ़ती हैं।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि पराली को जलाने के बजाय उसे देशी खाद बनाकर खेतों में मिलाएं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा।

इधर, कृषि विभाग भी मामले को लेकर सतर्क दिख रहा है। एडीओ कृषि कृष्ण कुमार ने बताया कि पराली जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कुछ किसान मनमानी कर रहे हैं, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने के मामलों की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर किसानों के खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा और आवश्यकतानुसार कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। विभाग की टीम लगातार गांवों में निगरानी कर रही है।

प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि नियमों का पालन करें और पर्यावरण की सुरक्षा में सहयोग दें। साथ ही उन्होंने चेताया कि अगर पराली जलाने की घटनाएं नहीं रुकीं तो कड़े कदम उठाए जाएंगे।


निष्कर्ष:

वजीरगंज में पराली जलाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। प्रतिबंध व जागरूकता के बावजूद किसान पराली को आग के हवाले कर रहे हैं, जिससे प्रदूषण और मिट्टी की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ रहा है। कृषि विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ऐसे किसानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की निगरानी बढ़ाई जा रही है और किसानों से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग की अपील की गई है।

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