नई दिल्ली: भारतीय खेल जगत के लिए गुरुवार, 5 नवंबर 2026 का दिन खास रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में देश का नाम रोशन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से बातचीत की और उनके शानदार प्रदर्शन की सराहना की। भारत ने इस प्रतियोगिता में कुल 114 पदक जीतकर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया था।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कठिन परिश्रम और मजबूत आत्मविश्वास के दम पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। प्रधानमंत्री के साथ इस संवाद कार्यक्रम में खिलाड़ियों के अलावा कोच, खेल संगठनों के प्रतिनिधि और खेल मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हुए।
114 पदक जीतकर भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड
जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत ने कुल 114 पदक अपने नाम किए। इसमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल रहे। यह प्रतियोगिता के इतिहास में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
इससे पहले 2023 में चीन के हांगझू में हुए एशियन पैरा गेम्स में भारत ने 108 पदक जीते थे। इस बार भारतीय खिलाड़ियों ने उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। लगातार दूसरी बार भारत ने 100 से अधिक पदक जीतकर पैरा खेलों में अपनी बढ़ती ताकत का परिचय दिया।
कुल 97 भारतीय पैरा एथलीटों ने पदक जीतने में योगदान दिया। यह उपलब्धि केवल पदकों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में पैरा खेलों के विकास और खिलाड़ियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी दर्शाती है।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों की मेहनत और जज्बे को सराहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों से संवाद के दौरान उनकी उपलब्धियों को देश के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने भारतीय दल के सदस्यों की मेहनत, अनुशासन और संघर्ष की सराहना की। पैरा खिलाड़ियों की सफलता ने यह संदेश दिया कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति के सपनों और लक्ष्य हासिल करने की क्षमता को सीमित नहीं कर सकतीं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य खिलाड़ियों को सम्मान देना, उनके अनुभव सुनना और भविष्य की खेल प्रतिभाओं को प्रेरित करना भी रहा। खिलाड़ियों के साथ कोच और सहयोगी अधिकारियों की मौजूदगी ने यह भी रेखांकित किया कि किसी बड़ी खेल उपलब्धि के पीछे पूरी टीम का योगदान होता है।
पैरा एथलेटिक्स बना भारत की सबसे बड़ी ताकत
इस बार भारत के पदक अभियान में पैरा एथलेटिक्स सबसे सफल खेल रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में 65 पदक जीते, जिनमें 22 स्वर्ण, 19 रजत और 24 कांस्य पदक शामिल थे।
पैरा बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ियों ने 16 पदक हासिल किए। वहीं पैरा तैराकी में 11 पदक भारत के खाते में आए। पैरा तीरंदाजी में छह और पैरा शूटिंग में पांच पदक मिले। पैरा टेबल टेनिस, पावरलिफ्टिंग और जूडो में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीतकर देश की कुल संख्या को मजबूत किया।
इन आंकड़ों से साफ है कि भारतीय पैरा खेल अब कुछ चुनिंदा स्पर्धाओं तक सीमित नहीं है। कई अलग-अलग खेलों में भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।
सुमित अंतिल ने बरकरार रखा स्वर्ण पदक
भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखा। उन्होंने पुरुषों की एफ42-एफ44/एफ61-एफ64 श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन इतना दमदार रहा कि पोडियम के तीनों स्थानों पर भारत का कब्जा रहा।
सुमित अंतिल की सफलता ने एक बार फिर भारतीय पैरा एथलेटिक्स की ताकत को दुनिया के सामने रखा। उनका प्रदर्शन उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखते हैं।
सिमरन शर्मा और मोना अग्रवाल ने भी रचा इतिहास
धाविका सिमरन शर्मा ने महिलाओं की 100 मीटर और 200 मीटर टी12 स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। उन्होंने दोनों स्पर्धाओं में गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। उनकी इस सफलता ने भारतीय एथलेटिक्स अभियान को नई ऊंचाई दी।
वहीं निशानेबाज मोना अग्रवाल ने महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन एसएच1 स्पर्धा में रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता। पैरा शूटिंग में भारत को 2028 के ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक के लिए दो कोटा भी हासिल हुए।
एक और उल्लेखनीय उपलब्धि 50 वर्षीय जेहान दोराब मदन के नाम रही। उन्होंने पैरा टेबल टेनिस में कांस्य पदक जीतकर भारत के सबसे उम्रदराज पदक विजेता बनने का गौरव हासिल किया।
पैरा खेलों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संदेश
प्रधानमंत्री के साथ खिलाड़ियों का यह संवाद केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि देश में पैरा खेलों को और मजबूत बनाने का अवसर भी है। खिलाड़ियों की उपलब्धियां बताती हैं कि बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और प्रोत्साहन मिलने पर भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर और बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
114 पदकों का रिकॉर्ड आने वाले खिलाड़ियों के लिए नया लक्ष्य तय करता है। अब चुनौती इस प्रदर्शन को बरकरार रखने और अगले अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में इससे भी बेहतर परिणाम हासिल करने की होगी।