वेदों के साथ विज्ञान और AI की फ्री पढ़ाई! बक्सर में खुलेगा बिहार का पहला गुरुकुलम, दक्षिण भारत से आएंगे शिक्षक

पटना। बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल की तैयारी हो रही है, जहां प्राचीन गुरुकुल परंपरा और आधुनिक तकनीकी शिक्षा का अनोखा मेल देखने को मिलेगा। शिक्षा विभाग बिहार में पहला गुरुकुलम शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके लिए बक्सर को चुना गया है। खास बात यह है कि यहां बच्चों को वेदों के साथ विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शिक्षा दी जाएगी और पढ़ाई पूरी तरह नि:शुल्क रखने की योजना है।

शिक्षा विभाग की ओर से जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजे जाने की बात कही गई है। मंजूरी मिलने के बाद योजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

बक्सर में पांच एकड़ जमीन उपलब्ध

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए संत जीयर स्वामी की ओर से बक्सर सदर क्षेत्र में करीब पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि गुरुकुलम की स्थापना के लिए यदि भविष्य में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होगी तो उसमें भी सहायता देने की बात कही गई है।

प्रस्तावित गुरुकुलम का निर्माण भी पारंपरिक गुरुकुल की तर्ज पर किए जाने की योजना है। यानी आधुनिक सुविधाओं के साथ परिसर में ऐसी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास होगा, जहां विद्यार्थी शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और भारतीय परंपराओं से भी परिचित हो सकें।

दक्षिण भारत से आएंगे शिक्षक

गुरुकुलम में शिक्षकों की व्यवस्था भी इस परियोजना की खास विशेषता होगी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के मुताबिक दक्षिण भारत के शिक्षकों को यहां पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य की ओर से शिक्षकों को उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है। इसके अलावा बेंगलुरु स्थित सत्य साईं संस्थान की ओर से भी बिहार में शुरू होने वाले गुरुकुलम के लिए शिक्षकों को भेजने की बात कही गई है।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत कुछ विद्यार्थियों ने भी इस गुरुकुलम में अपनी सेवाएं देने में रुचि दिखाई है। इससे उम्मीद है कि यहां पारंपरिक विषयों के साथ आधुनिक अकादमिक विषयों के लिए भी अलग-अलग विशेषज्ञ उपलब्ध हो सकते हैं।

पहली से इंटर तक होगी पढ़ाई

प्रस्तावित गुरुकुलम में कक्षा एक से लेकर इंटरमीडिएट तक पढ़ाई कराने की योजना है। प्रत्येक कक्षा में 30-30 विद्यार्थियों के दो सेक्शन रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार करने की बात कही गई है कि विद्यार्थियों को पारंपरिक भारतीय ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा भी मिल सके। इसमें वेद, कर्मकांड, विज्ञान और AI जैसे विषयों के अलावा हिंदी और अंग्रेजी साहित्य को भी शामिल किया जाएगा।

इस तरह गुरुकुलम का मॉडल केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं होगा, बल्कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और बदलते दौर की जरूरतों के लिए भी तैयार करने की कोशिश की जाएगी।

पूरी तरह आवासीय होगा गुरुकुलम

गुरुकुलम की व्यवस्था पूरी तरह आवासीय रखने की योजना है। यहां चयनित विद्यार्थियों के रहने और भोजन की व्यवस्था परिसर में ही की जाएगी। पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए भी आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

आवासीय व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ एक अनुशासित और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराना है। गुरुकुल परंपरा में शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहती थी, इसलिए प्रस्तावित मॉडल में भी विद्यार्थियों के दैनिक जीवन और शिक्षा को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा सकती है।

आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मिलेगी प्राथमिकता

इस गुरुकुलम की सबसे बड़ी खासियत इसकी नि:शुल्क शिक्षा होगी। योजना के मुताबिक विद्यार्थियों से पढ़ाई की फीस नहीं ली जाएगी। आर्थिक रूप से कमजोर और कम आय वाले परिवारों से आने वाले बच्चों को नामांकन में प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

हालांकि, दाखिले की अंतिम प्रक्रिया, आय सीमा, चयन परीक्षा या अन्य पात्रता मानदंडों को लेकर विस्तृत जानकारी योजना की औपचारिक मंजूरी और दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

वेद से लेकर AI तक का अनोखा मॉडल

आज के दौर में जहां शिक्षा तेजी से डिजिटल और तकनीक आधारित हो रही है, वहीं इस गुरुकुलम में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की योजना है।

वेद और कर्मकांड के साथ विज्ञान और AI की पढ़ाई कराने का मॉडल इसे सामान्य स्कूलों से अलग बना सकता है। विद्यार्थियों को एक तरफ भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराया जाएगा, तो दूसरी तरफ आधुनिक विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र की समझ विकसित करने का प्रयास होगा।

यही संतुलन इस परियोजना को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

इंटर के बाद स्नातक की भी तैयारी

गुरुकुलम की योजना केवल इंटरमीडिएट तक सीमित रखने की बात नहीं है। इंटर के बाद विद्यार्थियों को स्नातक स्तर की पढ़ाई उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है।

इस संबंध में दिल्ली स्थित लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय से बातचीत किए जाने की जानकारी सामने आई है। यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो विद्यार्थियों को गुरुकुलम से ही उच्च शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

बिहार की शिक्षा व्यवस्था में नया प्रयोग

बक्सर में प्रस्तावित यह गुरुकुलम बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक अलग तरह का प्रयोग साबित हो सकता है। एक ही परिसर में वेद और भारतीय परंपरा के साथ विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी और AI जैसे आधुनिक विषयों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

अब सबसे बड़ा इंतजार कैबिनेट की मंजूरी और उसके बाद जारी होने वाले आधिकारिक दिशा-निर्देशों का है। योजना के अंतिम स्वरूप, प्रवेश प्रक्रिया और पाठ्यक्रम की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर साफ होगी।

बिहार में प्रस्तावित पहला गुरुकुलम प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपरा और आधुनिक तकनीकी शिक्षा को एक साथ लाने की कोशिश है। बक्सर में पांच एकड़ जमीन पर प्रस्तावित इस आवासीय संस्थान में पहली से इंटर तक नि:शुल्क शिक्षा देने की योजना है। यहां वेद, कर्मकांड, विज्ञान और AI के साथ हिंदी और अंग्रेजी की पढ़ाई भी कराई जाएगी। दक्षिण भारत से शिक्षकों को बुलाने की तैयारी है, जबकि इंटर के बाद स्नातक शिक्षा की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।

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