ढाका। बांग्लादेश के झेनाइदह जिले के कालीगंज इलाके में 44 वर्षीय एक हिंदू विधवा महिला से गैंगरेप की shocking घटना सामने आई है। आरोपियों ने महिला के साथ बर्बरता की और उसे पेड़ से बांधकर पीटा। घटना का मोबाइल वीडियो भी बनाया गया। पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
पीड़ित महिला अपने 10 साल के बेटे के साथ उसी गांव में रहती हैं, जहां यह घटना हुई। महिला ने सोमवार को कालीगंज पुलिस थाने में 4 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने 45 वर्षीय हसन को गिरफ्तार किया है, जो इलाके का निवासी है।
कैसे हुई घटना
पुलिस और स्थानीय लोगों के अनुसार, महिला ने करीब दो साल पहले गांव में घर और जमीन खरीदी थी। आरोप है कि जमीन बेचने वाले शाहीन के भाई के माध्यम से उसने जमीन ली थी। इसके बाद से शाहीन महिला को लगातार धमकाता और पैसे की मांग करता रहा।
घटना के दिन महिला के दो पुरुष रिश्तेदार उससे मिलने आए थे। उसी समय शाहीन और हसन घर में जबरन घुस आए। उन्होंने महिला के रिश्तेदारों को एक कमरे में बंद कर दिया और महिला को अलग कमरे में ले जाकर गैंगरेप किया।
इसके बाद आरोपियों ने महिला और उसके रिश्तेदारों को घर से बाहर खींचकर पेड़ से बांध दिया और उन पर अश्लील गतिविधियों का झूठा आरोप लगाया। महिला के बाल काट दिए गए और उसे पीटा गया।
पीड़िता को गंभीर स्थिति में कालीगंज इलाके के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इलाज के कारण केस दर्ज करने में थोड़ी देरी हुई।
एक आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी
कालीगंज पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज जेलाल हुसैन ने बताया कि एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी और तलाशी जारी है। पुलिस ने कहा कि दोषियों को कानूनी कार्रवाई के तहत सजा दिलाने की पूरी कोशिश की जाएगी।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हमले
इस घटना के बाद इलाके में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ गई है। पिछले 18 दिनों में बांग्लादेश में चार हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है। जेसोर जिले में सोमवार को 38 वर्षीय हिंदू कारोबारी राणा प्रताप बैरागी को गोली मारकर हत्या कर दी गई।
लोकल लोगों ने बताया कि बदमाश मोटरसाइकिल पर आए थे। उन्होंने राणा प्रताप को उनके काम की जगह से बाहर बुलाया और पास की गली में कई गोलियां चला दीं। मृतक मौके पर ही शहीद हो गए। इससे पहले 18 दिसंबर को दीपू चंद्र की हत्या हुई थी, जबकि 24 और 29 दिसंबर को भी दो और हिंदुओं की हत्या की गई।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कालीगंज की घटना दिखाती है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा अभी भी खतरे में है। पुलिस की सक्रियता और दोषियों की कड़ी सजा ही ऐसे अपराधों को रोक सकती है।



