ईरान ने अमेरिका के सामने रख दीं युद्ध खत्म करने की शर्तें, कतर के जरिए ट्रंप तक पहुंचा बड़ा संदेश; अब क्या होगा?

ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच कूटनीतिक मोर्चे से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। ईरान ने अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने और बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए अपनी शर्तें रखी हैं। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई के मुताबिक, तेहरान ने अपना संदेश कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है और अब वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।

इस घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि ईरान की ओर से बातचीत की इच्छा के साथ-साथ सैन्य तैयारी जारी रखने का संदेश भी दिया गया है। रेजाई ने कहा कि अगर अमेरिका बातचीत और ईरान की शर्तों को स्वीकार करता है तो रास्ता खुल सकता है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनका देश किसी संभावित नए हमले के लिए तैयार है। यानी तेहरान की रणनीति में कूटनीति और सैन्य तैयारी दोनों साथ-साथ चलती दिखाई दे रही हैं।

कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचा संदेश

ईरानी अधिकारी के मुताबिक, कतर इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रेजाई ने बताया कि कतर ने ईरान की शर्तों को वॉशिंगटन तक पहुंचा दिया है। अब तेहरान अमेरिकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।

कतर पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। पाकिस्तान भी दोनों पक्षों के बीच संपर्क और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिशों में शामिल रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत का पिछला प्रयास एक समझौते के खत्म होने के बाद रुक गया था और अब क्षेत्रीय मध्यस्थ नए सिरे से बातचीत का रास्ता तलाश रहे हैं।

ईरान की मुख्य शर्तें क्या हैं?

मोहसेन रेजाई ने सार्वजनिक रूप से तीन प्रमुख शर्तों का जिक्र किया है। पहली शर्त है सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य कार्रवाई को रोकना। दूसरी मांग है विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करना। तीसरी मांग है अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म करना।

रेजाई ने एक अलग बयान में कहा कि बातचीत शुरू करने के लिए ईरान ने कुल सात शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई हैं। हालांकि, सार्वजनिक रूप से सभी सात शर्तों का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सातों शर्तों में कौन-कौन से अतिरिक्त मुद्दे शामिल हैं।

क्या ईरान सच में युद्ध खत्म करना चाहता है?

ईरान के संदेश में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि तेहरान एक तरफ बातचीत का रास्ता खोल रहा है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य विकल्प को भी खुला रख रहा है।

रेजाई ने कहा है कि ईरान किसी संभावित नए अमेरिकी हमले के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि सैन्य संघर्ष आगे बढ़ता है तो ईरान जवाब देने की तैयारी रखता है। हालांकि ये बयान ईरानी अधिकारी के हैं और इन्हें ईरान की आधिकारिक स्थिति के संदर्भ में समझना जरूरी है।

यानी मौजूदा स्थिति को सीधे तौर पर युद्धविराम या शांति समझौता नहीं कहा जा सकता। फिलहाल मामला प्रस्तावों, मध्यस्थता और संभावित बातचीत के स्तर पर है।

अमेरिका का अगला कदम क्यों अहम?

अब सबसे बड़ा सवाल अमेरिका की प्रतिक्रिया को लेकर है। ईरान ने अपनी शर्तें पहुंचा दी हैं और कतर के जरिए संदेश भी भेज दिया गया है। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन का जवाब आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर आगे के फैसले की बात कही है। वहीं ईरान की तरफ से बातचीत की संभावनाओं के साथ सैन्य तैयारी का संदेश दिया जा रहा है। इस वजह से आने वाले दिनों में कूटनीतिक गतिविधियां काफी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी अहम मुद्दे

ईरान-अमेरिका विवाद केवल युद्ध रोकने तक सीमित नहीं है। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध, जमे हुए ईरानी फंड और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे मुद्दे भी पूरे संकट से जुड़े हुए हैं।

रेजाई ने परमाणु हथियारों को लेकर ईरान की मौजूदा नीति में बदलाव से इनकार किया, हालांकि उन्होंने भविष्य की परिस्थितियों में दबाव बढ़ने की संभावना का उल्लेख किया। दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच बातचीत चलती रही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्या अब युद्ध खत्म होने का रास्ता खुलेगा?

फिलहाल इसका निश्चित जवाब देना संभव नहीं है। ईरान ने बातचीत के लिए अपनी शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं, लेकिन इन शर्तों को स्वीकार करना या अस्वीकार करना अमेरिका के हाथ में है। इसके अलावा युद्ध खत्म करने के लिए केवल दो देशों की सहमति ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्ग, प्रतिबंध और अन्य संबंधित पक्षों के मुद्दों पर भी सहमति जरूरी हो सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम में कतर की मध्यस्थ भूमिका खास हो गई है। अगर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मतभेदों को कम करने में मध्यस्थ सफल होते हैं, तो बातचीत का अगला दौर शुरू हो सकता है। लेकिन अभी इसे शांति समझौते की शुरुआत कहना जल्दबाजी होगी

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