नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन इन दिनों अपनी फॉर्म को लेकर चर्चा में हैं। टी20 विश्व कप में बल्ले से शानदार प्रदर्शन करके भारत की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने वाले संजू अब लगातार रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दूसरी तरफ, ईशान किशन ने टीम में वापसी के बाद अपनी उपयोगिता साबित की है, जबकि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी ओपनिंग के लिए मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या टीम में बढ़ती प्रतिस्पर्धा संजू के प्रदर्शन को प्रभावित कर रही है?
टी20 विश्व कप के हीरो का बल्ला क्यों है खामोश?
संजू सैमसन की मौजूदा स्थिति इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि कुछ समय पहले तक वह भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद टी20 बल्लेबाजों में गिने जा रहे थे। टी20 विश्व कप के दौरान उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में शानदार पारियां खेलीं और भारत की खिताबी जीत में अहम योगदान दिया।
वेस्टइंडीज के खिलाफ करो या मरो वाले मुकाबले में उन्होंने नाबाद 97 रन बनाए थे। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल और न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में भी उन्होंने 89-89 रन की पारियां खेलीं। उनके इस प्रदर्शन के लिए उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था।
लेकिन विश्व कप के बाद उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी दिखाई दी। भारत के लिए अगली 11 पारियों में संजू के स्कोर 5, 0, 1, 27, 10, 57, 50, 9, 7, 2 और 11 रन रहे। इस दौरान वह केवल दो अर्धशतक लगा सके और छह पारियों में दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाए।
वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भी संजू सिर्फ 11 रन बनाकर आउट हो गए। उनकी इस पारी के बाद टीम में उनकी जगह को लेकर चर्चा तेज हो गई।
ईशान किशन की वापसी से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
भारतीय टीम में सलामी बल्लेबाज की जगह के लिए मुकाबला पहले से ही कड़ा रहा है। अभिषेक शर्मा ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से ओपनिंग में जगह मजबूत की है। ऐसे में दूसरी जगह के लिए संजू सैमसन, ईशान किशन, यशस्वी जायसवाल और अब वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों के नाम चर्चा में हैं।
ईशान किशन ने टीम में वापसी के बाद रन बनाकर अपनी दावेदारी मजबूत की है। वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 में उन्होंने श्रेयस अय्यर के साथ नाबाद साझेदारी की और भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
पूर्व भारतीय बल्लेबाज हनुमा विहारी का मानना है कि जब टीम में किसी खिलाड़ी को अपनी जगह के लिए लगातार प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, तो उसका असर मानसिक स्थिति और प्रदर्शन पर पड़ सकता है। उन्होंने संजू के पहले के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि टीम में प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर संजू असुरक्षित महसूस करने की बात कह चुके हैं।
अब वैभव सूर्यवंशी की चुनौती
ईशान किशन के बाद संजू सैमसन के सामने एक और युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी की चुनौती है। कम उम्र में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव ने सीमित अवसरों में भी क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है।
वैभव की मौजूदगी से भारतीय टीम के पास ओपनिंग के लिए एक और विकल्प मौजूद है। हालांकि, प्रतिभा के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव और लगातार अच्छा प्रदर्शन भी चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में वैभव को अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी। इसके बावजूद उनकी दावेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। टीम प्रबंधन के सामने यह फैसला लेने की चुनौती है कि मौजूदा फॉर्म को प्राथमिकता दी जाए या विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर चुके संजू को अधिक मौके दिए जाएं।
हनुमा विहारी ने दबाव को बताया अहम वजह
हनुमा विहारी के अनुसार, भारतीय टीम के लिए खेलते समय दबाव स्वाभाविक है। यहां हर खिलाड़ी के प्रदर्शन पर करोड़ों प्रशंसकों की नजर रहती है और टीम में जगह बनाए रखने के लिए लगातार अच्छा खेलना पड़ता है।
उनका मानना है कि संजू के लिए जरूरी है कि वह प्रतिस्पर्धा के दबाव से बाहर निकलकर अपने खेल पर ध्यान दें। किसी खिलाड़ी की प्रतिभा पर संदेह किए बिना उसकी मौजूदा फॉर्म का आकलन करना भी जरूरी है।
संजू के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी क्षमता साबित करने का अनुभव है। अब जरूरत इस बात की है कि वह अपनी शुरुआत को बड़ी पारियों में बदलें और टीम प्रबंधन का भरोसा फिर से मजबूत करें।
क्या संजू सैमसन की जगह खतरे में है?
भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज संजू के लिए अहम साबित हो सकती है। शुक्रवार को रांची में होने वाले दूसरे मुकाबले में उनके प्रदर्शन पर विशेष नजर रहने की उम्मीद है।
हालांकि, केवल कुछ पारियों के आधार पर किसी खिलाड़ी के भविष्य का अंतिम फैसला करना जल्दबाजी होगी। संजू ने बड़े मुकाबलों में अपनी क्षमता साबित की है, लेकिन टीम में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच उन्हें लगातार प्रदर्शन करना होगा।



