नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026। देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। इसी बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार रात 8 बजे INDIA गठबंधन के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात का समय दिया है। विपक्षी दल इस बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़ी अपनी चिंताओं को उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समेत कई प्रमुख विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इस मुलाकात को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब विपक्ष लगातार प्रदर्शन कर रहा है और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठा रहा है।
राष्ट्रपति भवन ने रात 8 बजे का समय दिया
INDIA गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए पहले ही अनुरोध किया था। विपक्ष का कहना था कि वह SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात राष्ट्रपति के सामने रखना चाहता है। शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन की ओर से प्रतिनिधिमंडल को रात 8 बजे मिलने का समय दिए जाने की जानकारी सामने आई।
इससे पहले विपक्षी नेताओं ने कहा था कि उन्होंने राष्ट्रपति से मिलने के लिए पत्र भेजा है और जवाब का इंतजार कर रहे हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के अनुसार, गठबंधन की ओर से पहली चिट्ठी 2 अक्टूबर को भेजी गई थी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम मांगे जाने पर 5 अक्टूबर को दोबारा अनुरोध किया गया था।
अब मुलाकात का समय तय होने के बाद विपक्षी दल अपनी मांगों और शिकायतों को औपचारिक रूप से राष्ट्रपति के सामने रखने की तैयारी कर रहे हैं।
कौन-कौन से नेता होंगे प्रतिनिधिमंडल में शामिल?
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में 10 से अधिक विपक्षी नेताओं के शामिल होने की संभावना है। अब तक सामने आए प्रमुख नामों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और माकपा महासचिव एमए बेबी शामिल हैं।
इसके अलावा समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई है। प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों की अंतिम सूची को लेकर समन्वय जारी रहने की जानकारी सामने आई थी।
विपक्षी दलों की कोशिश है कि अलग-अलग राज्यों और राजनीतिक संगठनों की चिंताओं को एक साझा ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति के सामने रखा जाए। हालांकि, बैठक में उठाए जाने वाले प्रत्येक मुद्दे और ज्ञापन की अंतिम सामग्री की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है।

SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की मुख्य आपत्ति क्या है?
SIR यानी मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को जांचने और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना और पात्र मतदाताओं के विवरण को सही करना है।
लेकिन विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं। उनका कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
विपक्ष ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देने और शिकायतों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठे विवाद में आरोपों और आधिकारिक तथ्यों के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। विपक्ष की आशंकाएं अपने आप में यह साबित नहीं करतीं कि सभी आरोप सही हैं।
ज्ञानेश कुमार को लेकर भी उठ सकता है मुद्दा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की नाराजगी भी इस पूरे विवाद का अहम हिस्सा है। INDIA गठबंधन के नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं और SIR को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर जवाब मांग रहे हैं।
विपक्ष के कुछ नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी की है। उनका तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
हालांकि, चुनाव आयोग की भूमिका और किसी अधिकारी के खिलाफ उठाए गए राजनीतिक आरोपों का मूल्यांकन तथ्यों, संवैधानिक प्रावधानों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति के साथ प्रस्तावित बैठक में विपक्ष अपनी शिकायतें और मांगें औपचारिक रूप से रख सकता है।
संसद से राष्ट्रपति भवन तक क्यों बढ़ा राजनीतिक दबाव?
पिछले कुछ दिनों से विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर भी प्रदर्शन किया और मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठाया।
शुक्रवार को विपक्षी सांसदों की बैठक संसद भवन के सेंट्रल हॉल में भी प्रस्तावित थी। यहां प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों और आगे की रणनीति पर चर्चा की जानी थी। राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मिलने से पहले विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति भवन तक मार्च करने की संभावना भी जताई थी।
अब रात 8 बजे की बैठक तय होने के बाद राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी नजर है। विपक्ष इस मुलाकात के जरिए अपनी मांगों को संवैधानिक स्तर पर उठाना चाहता है।
बैठक के बाद क्या होगा?
राष्ट्रपति से मुलाकात में विपक्षी नेताओं की ओर से ज्ञापन सौंपे जाने और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, बैठक का समय तय होने का अर्थ यह नहीं है कि विपक्ष की सभी मांगें स्वीकार कर ली गई हैं या चुनाव आयोग के खिलाफ कोई निर्णय हो गया है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि राष्ट्रपति के सामने विपक्ष किन मुद्दों को प्राथमिकता देता है और बैठक के बाद क्या जानकारी साझा की जाती है। SIR प्रक्रिया पर विवाद आगे भी राजनीतिक बहस का विषय बना रह सकता है।
इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी है क्योंकि मतदाता सूची चुनावी लोकतंत्र की बुनियादी व्यवस्था का हिस्सा है। पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखना, गलत प्रविष्टियों को सुधारना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सभी संबंधित संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शुक्रवार रात की मुलाकात इसी बहस के बीच विपक्ष को अपनी चिंताएं सीधे राष्ट्रपति के सामने रखने का अवसर देगी।



