मां की मौत का बदला या गहनों की लालच? जादू-टोने के शक में बुजुर्ग दंपती की हत्या, पड़ोसी निकला आरोपी

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास स्थित एक गांव में बुजुर्ग दंपती की हत्या के मामले ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस के मुताबिक, इस वारदात के पीछे करीब एक साल पुरानी रंजिश, जादू-टोने को लेकर संदेह और गहने लूटने की नीयत सामने आई है। मामले में गांव के ही 22 वर्षीय युवक प्रमोद उर्फ रॉकी साहू को गिरफ्तार किया गया है।

मृतकों की पहचान सदाशी साहू और उनकी पत्नी आसबती साहू के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को संदेह था कि दंपती ने जादू-टोना करके उसकी मां की जान ली थी। इसी शक के चलते वह दोनों से नाराज रहने लगा था। हालांकि, जादू-टोने से जुड़ा यह आरोप आरोपी का कथित संदेह था, कोई प्रमाणित तथ्य नहीं।

बिरबिरा गांव में कैसे सामने आया मामला?

यह घटना रायपुर जिले के आरंग थाना क्षेत्र के ग्राम बिरबिरा की है। पुलिस के मुताबिक, 8 अक्टूबर 2026 को गांव के सरपंच चम्मन लाल साहू ने थाने में सूचना दी कि सदाशी साहू और उनकी पत्नी आसबती साहू की घर में घुसकर हत्या कर दी गई है।

सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची। जांच के दौरान घर के अलग-अलग कमरों में दोनों के शव मिले। शुरुआती जानकारी में धारदार हथियार से हमला किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और फोरेंसिक विशेषज्ञों तथा डॉग स्क्वायड की मदद ली। जांच के दौरान पुलिस ने ग्रामीणों से पूछताछ की और संदिग्धों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई।

मां की मौत को लेकर मन में बैठा था शक

पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान गांव के ही प्रमोद उर्फ रॉकी साहू पर संदेह गहराया। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो कथित तौर पर वारदात से जुड़ी जानकारी सामने आई।

पुलिस का कहना है कि आरोपी की मां की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से वह संदेह करने लगा था कि सदाशी साहू और उनकी पत्नी आसबती साहू ने जादू-टोना करके उसकी मां की जान ली है। इसी धारणा के कारण वह बुजुर्ग दंपती के प्रति रंजिश रखने लगा था।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि किसी की बीमारी या मृत्यु के लिए जादू-टोने को जिम्मेदार मानना अपने आप में कोई प्रमाण नहीं है। पुलिस के मुताबिक, इसी तरह के संदेह ने आरोपी के मन में दुश्मनी को बढ़ाया और मामला गंभीर अपराध तक पहुंच गया।

हत्या के पीछे गहने लूटने की नीयत भी?

पुलिस की जांच में केवल पुरानी रंजिश ही नहीं, बल्कि गहने लूटने की नीयत भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी को पता था कि बुजुर्ग दंपती के पास जमीन है और आसबती साहू अक्सर सोने-चांदी के गहने पहनती थीं।

पुलिस का आरोप है कि वारदात के बाद आरोपी ने महिला के शरीर पर पहने गहने और घर में रखे कुछ आभूषण भी ले लिए। इस वजह से जांच में हत्या के साथ लूट के पहलू को भी महत्वपूर्ण माना गया।

इस मामले में पुलिस के सामने यह पता लगाना जरूरी था कि आरोपी की कथित रंजिश और गहने लेने की योजना किस तरह वारदात से जुड़ी थी। पूछताछ और बरामदगी के आधार पर पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़ने का दावा किया है।

रात में घर में घुसकर किया हमला

पुलिस के मुताबिक, वारदात 6 अक्टूबर की रात करीब 11:30 बजे हुई। आरोप है कि परिवारों के सो जाने के बाद आरोपी अपने घर की छत से निकला और दूसरे मकान की छत पार करते हुए बुजुर्ग दंपती के घर तक पहुंचा।

पुलिस के अनुसार, वह टंगिया और हंसिया लेकर घर में दाखिल हुआ। पहले कमरे में सो रहे सदाशी साहू पर हमला किया गया। इसके बाद दूसरे कमरे में सो रही आसबती साहू पर भी हमला किया गया। दोनों की मौत हो गई।

हत्या के बाद आरोपी कथित तौर पर गहने लेकर वहां से चला गया। पुलिस का कहना है कि उसने हथियारों को छिपाने की कोशिश की थी, लेकिन जांच के दौरान उसके बारे में सुराग मिले।

48 घंटे में गिरफ्तारी, हथियार और गहने बरामद

पुलिस के अनुसार, मामले का खुलासा लगभग 48 घंटे के भीतर कर लिया गया। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसकी निशानदेही पर कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल टंगिया और हंसिया, खून के निशान वाली जींस और लूटे गए सोने-चांदी के गहने बरामद किए गए।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाले न्यायिक परीक्षण के बाद ही होगी।

अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता क्यों जरूरी?

यह घटना एक बार फिर बताती है कि जादू-टोने जैसे निराधार संदेह किस तरह लोगों के बीच दुश्मनी और हिंसा को बढ़ावा दे सकते हैं। किसी बीमारी, पारिवारिक परेशानी या मृत्यु के लिए किसी व्यक्ति को बिना सबूत जिम्मेदार ठहराना खतरनाक हो सकता है।

ऐसे मामलों में ग्रामीण समुदायों, स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। लोगों को वैज्ञानिक सोच, कानूनी जागरूकता और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। किसी पर अंधविश्वास के आधार पर आरोप लगाने के बजाय संदिग्ध परिस्थितियों में पुलिस और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।

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