पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर झोटा की LIVE वीडियो में हत्या! मेडिकल स्टोर पर बहस के बाद चलीं गोलियां, 4 साथी भी घायल

मानसा, पंजाब: पंजाब के मानसा में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को एक सनसनीखेज गोलीकांड सामने आया। नशे की कथित बिक्री के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की एक मेडिकल स्टोर पर गोली लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना के समय वह सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो बना रहे थे। इसी दौरान मेडिकल स्टोर संचालक के साथ उनकी बहस हुई और मामला गोलीबारी तक पहुंच गया। इस घटना में उनके साथ मौजूद चार अन्य लोग भी घायल हुए हैं।

घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि परविंदर झोटा को बचाया नहीं जा सका। इस वारदात ने पंजाब में नशे की कथित अवैध बिक्री और उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मेडिकल स्टोर पर किस बात को लेकर हुआ विवाद?

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, परविंदर सिंह झोटा अपने साथियों के साथ मानसा शहर में रेलवे फाटक के नजदीक स्थित एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे। वहां नशे की कथित बिक्री को लेकर दुकान संचालक से उनकी बहस शुरू हुई।

बताया गया है कि झोटा मेडिकल स्टोर पर नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर सवाल उठा रहे थे। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया। इसी दौरान दुकान संचालक ने कथित तौर पर पिस्तौल निकाल ली। बहस आगे बढ़ने पर उसने गोली चला दी।

रिपोर्टों के मुताबिक, गोलीबारी के दौरान परविंदर झोटा गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि, विवाद की पूरी पृष्ठभूमि, कथित बिक्री से संबंधित आरोपों और घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। किसी व्यक्ति या दुकान पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री का आरोप लगना अपने आप में अपराध साबित होने के बराबर नहीं है।

LIVE वीडियो में कैद हुई वारदात

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गोलीबारी के दौरान सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो प्रसारित हो रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक, परविंदर झोटा के फेसबुक पेज पर प्रसारित करीब पांच मिनट 48 सेकंड के वीडियो में विवाद और गोली चलने की घटना दर्ज हुई।

वीडियो में कथित तौर पर दुकान संचालक और झोटा के साथ आए लोगों के बीच बहस दिखाई देती है। इसके बाद गोली चलने की आवाज और अफरा-तफरी की स्थिति सामने आती है। गोली लगने के बाद झोटा वहां से सड़क की ओर भागते दिखाई दिए और गिर पड़े।

घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। लाइव वीडियो सामने आने से वारदात की चर्चा तेजी से फैल गई। हालांकि, ऐसे वीडियो को साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता और पीड़ितों की गरिमा का ध्यान रखना जरूरी है।

परविंदर झोटा की अस्पताल में मौत

गोली लगने के बाद परविंदर झोटा को मानसा के सिविल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल से जुड़ी जानकारी के अनुसार, उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। रिपोर्टों में उनके शरीर पर गोली लगने के कई घाव होने का उल्लेख किया गया है।

गोलीबारी में उनके साथ आए चार अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। उनकी चोटों की गंभीरता और स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

घटना की खबर फैलने के बाद अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ जुटने की रिपोर्ट भी सामने आई। स्थानीय लोगों और समर्थकों में घटना को लेकर नाराजगी देखी गई।

नशे के खिलाफ अभियान के कारण चर्चा में थे झोटा

परविंदर सिंह झोटा पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने और मेडिकल स्टोरों से नशीले पदार्थों की कथित बिक्री का मुद्दा उठाने के कारण चर्चा में रहे थे। वह इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करते थे।

उनकी हत्या ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। साथ ही, कथित अवैध बिक्री की शिकायतों पर संबंधित विभागों की जांच और कानूनी कार्रवाई कितनी प्रभावी है, इस पर भी बहस हो सकती है।

हालांकि, इस घटना को केवल नशा विरोधी अभियान से जोड़कर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। पुलिस जांच से ही स्पष्ट होगा कि विवाद किस वजह से शुरू हुआ, गोलीबारी की परिस्थितियां क्या थीं और घटना के पीछे अन्य कोई कारण था या नहीं।

पुलिस जांच और आरोपी को लेकर क्या जानकारी है?

प्रारंभिक रिपोर्टों में मेडिकल स्टोर संचालक पर गोली चलाने का आरोप लगाया गया है। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। आरोपी की स्थिति, गिरफ्तारी और उसके खिलाफ दर्ज धाराओं को लेकर अंतिम पुष्टि संबंधित पुलिस बयान से ही होनी चाहिए।

जांच में घटनास्थल के साक्ष्य, लाइव वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घायलों की जानकारी अहम हो सकती है। पुलिस यह भी जांच सकती है कि गोलीबारी में इस्तेमाल हथियार किसका था और विवाद से पहले क्या घटनाक्रम हुआ था।

फिलहाल इस मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखना जरूरी है। आगे की आधिकारिक जानकारी से स्पष्ट होगा कि पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है और मामले में कौन-कौन से कानूनी कदम उठाए गए हैं।

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