नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी कहानियां दर्ज हैं, जिनमें कलाकारों की सफलता के पीछे संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियां और विवादों का लंबा दौर छिपा रहा। ऐसी ही एक अभिनेत्री थीं मीनू मुमताज, जिन्होंने कम उम्र में फिल्मों की दुनिया में कदम रखा और अपनी अदाकारी के साथ-साथ डांस से भी पहचान बनाई। उनकी जिंदगी का एक दिलचस्प और विवादित अध्याय 1958 में आई फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ से जुड़ा है। इस फिल्म के एक गाने में वह अपने सगे भाई और मशहूर अभिनेता महमूद अली के साथ नजर आई थीं। उस दौर में इस दृश्य को लेकर काफी चर्चा हुई थी।
23 अक्टूबर को मीनू मुमताज की पुण्यतिथि होती है। इस मौके पर उनके फिल्मी सफर, शुरुआती संघर्ष और उस विवाद को याद किया जा रहा है, जिसने उन्हें लंबे समय तक चर्चा में बनाए रखा।
कौन थीं मीनू मुमताज?
मीनू मुमताज का जन्म मलिकुन्निसा अली के नाम से हुआ था। वह एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थीं, जिसका हिंदी फिल्म जगत से पुराना रिश्ता था। उनके पिता मुमताज अली अपने समय के जाने-माने डांसर और चरित्र अभिनेता थे। उनके भाई महमूद अली ने आगे चलकर हिंदी सिनेमा में कॉमेडी और अभिनय के क्षेत्र में बड़ी पहचान बनाई।
मीनू ने भी मनोरंजन जगत में अपनी अलग जगह बनाने के लिए मेहनत की। वह सिर्फ अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि एक कुशल डांसर भी थीं। शुरुआती दौर में उन्होंने फिल्मों में नृत्य और सहायक भूमिकाओं के जरिए दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
उनकी कहानी उस समय के फिल्मी परिवारों की चुनौतियों को भी सामने लाती है, जहां प्रतिभा के साथ-साथ आर्थिक परिस्थितियां भी कलाकारों के करियर की दिशा तय करती थीं।
13 साल की उम्र में क्यों शुरू किया फिल्मों में काम?
मीनू मुमताज के शुरुआती जीवन में परिवार की आर्थिक परेशानियों का अहम स्थान रहा। उनके पिता के करियर में गिरावट आने के बाद परिवार को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। ऐसे समय में परिवार के सदस्यों को कम उम्र में ही काम की जिम्मेदारी उठानी पड़ी।
मीनू ने किशोरावस्था में फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। विभिन्न प्रकाशित फिल्मी विवरणों के अनुसार, उन्हें लगभग 13 वर्ष की उम्र में शुरुआती फिल्मी अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे हिंदी फिल्मों में अपनी पहचान बनाई।
उस दौर में फिल्मों में जगह बनाना आसान नहीं था। कलाकारों को लगातार काम करके अपनी क्षमता साबित करनी पड़ती थी। मीनू ने डांस और अभिनय के जरिए अवसर हासिल किए और कई फिल्मों में दिखाई दीं।
उनका सफर यह भी बताता है कि पर्दे पर दिखाई देने वाली चमक-दमक के पीछे कई बार निजी संघर्षों की लंबी कहानी होती है।

‘हावड़ा ब्रिज’ में ऐसा क्या हुआ कि विवाद शुरू हो गया?
मीनू मुमताज के करियर से जुड़ा सबसे चर्चित प्रसंग 1958 की फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ का है। शक्ति सामंत के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अशोक कुमार और मधुबाला प्रमुख भूमिकाओं में थे। फिल्म अपने संगीत और कहानी के लिए भी जानी जाती है।
इसी फिल्म के गाने ‘गोरा रंग चुनरिया काली’ में मीनू मुमताज अपने भाई महमूद के साथ नजर आई थीं। दोनों वास्तविक जीवन में भाई-बहन थे, लेकिन गाने की प्रस्तुति में रोमांटिक अंदाज दिखाई दिया। दर्शकों के एक वर्ग ने इस प्रस्तुति पर आपत्ति जताई और इस जोड़ी को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
आज के दर्शक इसे उस समय के फिल्म निर्माण और प्रस्तुति के संदर्भ में देख सकते हैं, लेकिन उस दौर में पर्दे पर वास्तविक भाई-बहन को रोमांटिक अंदाज में देखना कई लोगों के लिए असहज था। इसी वजह से दोनों कलाकारों को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि विवाद फिल्म के गाने में दिखाई गई प्रस्तुति को लेकर था। इसे वास्तविक जीवन के किसी रोमांटिक रिश्ते के रूप में समझना गलत होगा।
क्या इस विवाद से खत्म हो गया मीनू का करियर?
इस गाने को लेकर चर्चा और आलोचना जरूर हुई, लेकिन मीनू मुमताज का फिल्मी सफर केवल इसी विवाद तक सीमित नहीं था। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और हिंदी सिनेमा के उस दौर की परिचित कलाकारों में अपनी जगह बनाई।
उनके करियर में ‘सीआईडी’, ‘कागज के फूल’, ‘चौदहवीं का चांद’ और ‘साहिब बीबी और गुलाम’ जैसी फिल्मों का उल्लेख मिलता है। इन फिल्मों में उनकी भूमिकाएं और नृत्य संबंधी प्रस्तुतियां उनके विविध अनुभव को दिखाती हैं।
फिल्मी दुनिया में किसी कलाकार की पहचान अक्सर एक चर्चित घटना से जोड़ दी जाती है, लेकिन मीनू की उपलब्धियों को समझने के लिए उनके लंबे करियर और अलग-अलग भूमिकाओं को भी याद रखना जरूरी है।
शादी के बाद विदेश में बस गईं मीनू मुमताज
मीनू मुमताज ने 1963 में फिल्म निर्देशक सैयद अली अकबर से शादी की। शादी के बाद वह धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया से दूर हो गईं और बाद में अपने परिवार के साथ कनाडा में रहने लगीं।
उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा परिवार के साथ बिताया। समय के साथ उनका सार्वजनिक जीवन सीमित हो गया, लेकिन पुराने हिंदी सिनेमा के प्रशंसकों के बीच उनका नाम और उनसे जुड़ी फिल्मी यादें बनी रहीं।
उनकी जिंदगी का यह दौर बताता है कि फिल्मी करियर की लोकप्रियता और निजी जीवन की प्राथमिकताएं हमेशा एक जैसी नहीं होतीं। कई कलाकार सफलता के बाद परिवार और निजी जीवन को अधिक महत्व देते हैं।
23 अक्टूबर 2021 को हुआ था निधन
मीनू मुमताज का निधन 23 अक्टूबर 2021 को कनाडा के टोरंटो में हुआ था। वह 79 वर्ष की थीं। उनके निधन की खबर से हिंदी फिल्म जगत और पुराने सिनेमा के प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई थी।
उनकी पहचान एक ऐसी कलाकार के रूप में बनी, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच अपने करियर की शुरुआत की और हिंदी फिल्मों के एक महत्वपूर्ण दौर का हिस्सा रहीं।
आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल एक पुराने विवाद को दोहराना नहीं, बल्कि उस कलाकार के जीवन और योगदान को समझना भी है, जिसने कम उम्र में काम शुरू किया और अपने समय के सिनेमा में अलग पहचान बनाई।



