वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक खबर सामने आई है। वर्ष 2026 में जनवरी से अक्टूबर के बीच करीब 900 लोगों की HIV जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमित पाए गए लोगों में किशोरों और युवाओं की संख्या भी काफी अधिक है। इन आंकड़ों ने संक्रमण से बचाव, समय पर जांच और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की जरूरत को फिर से रेखांकित किया है।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) अस्पताल में जनवरी से सितंबर के दौरान जांच कराने वाले 728 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। वहीं, दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में 175 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इस तरह दोनों अस्पतालों के आंकड़े मिलाकर कुल 903 मामले बनते हैं। इन आंकड़ों में वाराणसी के साथ आसपास के जिलों और बिहार से आने वाले मरीज भी शामिल हैं। इसलिए सभी मामलों को केवल वाराणसी शहर के निवासियों का आंकड़ा समझना सही नहीं होगा।
युवाओं में संक्रमण को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
रिपोर्ट में बताया गया है कि संक्रमित लोगों में 15 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों की संख्या उल्लेखनीय है। किशोरों और युवाओं में HIV को लेकर जागरूकता, सुरक्षित व्यवहार और समय पर जांच की अहमियत इस वजह से बढ़ जाती है।
हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में किशोरों और युवाओं की सटीक संख्या अलग से स्पष्ट नहीं है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी संक्रमित लोग किसी एक उम्र वर्ग से ही आते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए जरूरी है कि युवाओं को HIV कैसे फैलता है, इससे बचाव कैसे किया जा सकता है और संक्रमण की आशंका होने पर जांच कहां कराई जाए, इसकी सही जानकारी दी जाए। जागरूकता का उद्देश्य लोगों को डराना या दोषी ठहराना नहीं, बल्कि उन्हें समय रहते सुरक्षित और सही स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाना होना चाहिए।
साझा सिरिंज से नशीले पदार्थ लेना बड़ा जोखिम
रिपोर्ट में संक्रमण के संभावित कारणों में एक ही सिरिंज से नशीले पदार्थ लेना भी शामिल है। संक्रमित रक्त के संपर्क में आने वाली सिरिंज या सुई को साझा करने से HIV फैल सकता है।
जिला अस्पताल के ओएसटी सेंटर से संबंधित जानकारी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में साझा सिरिंज से नशीले पदार्थ लेने वाले 30 लोगों में HIV संक्रमण की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट में इनमें से दो महिलाओं की मृत्यु होने की बात भी कही गई है। यह जानकारी पिछले दो वर्षों से संबंधित है, इसे 2026 में सामने आए करीब 900 मामलों से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
रिपोर्ट में एक काउंसलर के हवाले से बताया गया है कि सिरिंज के जरिए नशीले पदार्थ लेने वाले लोग HIV पॉजिटिव मामलों में एक महत्वपूर्ण समूह हैं। ऐसे लोगों को नशामुक्ति सेवाओं, नियमित जांच, काउंसलिंग और आवश्यक उपचार से जोड़ना जरूरी है।

असुरक्षित यौन संबंध और टैटू बनवाते समय सावधानी जरूरी
HIV संक्रमित रक्त और कुछ शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैल सकता है। बिना सुरक्षा के यौन संबंध बनाना संक्रमण का एक प्रमुख जोखिम है। इसलिए कंडोम का सही इस्तेमाल, जरूरत के अनुसार HIV जांच और डॉक्टर से परामर्श बचाव के महत्वपूर्ण उपाय हैं।
टैटू बनवाते समय भी सावधानी जरूरी है। यदि सुई या अन्य उपकरणों पर संक्रमित रक्त लगा हो और उन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जाए, तो संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसलिए टैटू हमेशा प्रशिक्षित पेशेवर से बनवाएं और सुनिश्चित करें कि नई, स्टेराइल सुई तथा उचित संक्रमण नियंत्रण प्रक्रियाओं का पालन हो रहा है।
यह समझना भी जरूरी है कि हर टैटू या हर यौन संबंध से HIV नहीं फैलता। जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति संक्रमित रक्त या अन्य संक्रामक द्रवों के संपर्क में आया है या नहीं।
अस्पतालों में हो रही निशुल्क जांच और काउंसलिंग
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन करीब 120 लोगों की HIV और हेपेटाइटिस संबंधी जांच निशुल्क की जाती है। जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में भी नियमित जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध है। BHU अस्पताल में भी जांच की व्यवस्था है।
यदि किसी व्यक्ति की HIV रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो आगे की प्रक्रिया में पुष्टि संबंधी जांच, चिकित्सकीय परामर्श और जरूरत के अनुसार उपचार शामिल होता है। HIV की पुष्टि होने पर एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) से संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। नियमित दवा लेने और चिकित्सकीय देखरेख में रहने से संक्रमित व्यक्ति लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकता है।
समय पर जांच कराने से व्यक्ति को अपनी स्थिति जानने और उचित उपचार शुरू करने में मदद मिलती है। जांच को लेकर डर, शर्म या सामाजिक भेदभाव के कारण इलाज टालना नुकसानदायक हो सकता है।
HIV और AIDS में क्या अंतर है?
HIV एक वायरस है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। यदि संक्रमण का उपचार न हो, तो समय के साथ यह गंभीर अवस्था यानी AIDS तक पहुंच सकता है। लेकिन HIV पॉजिटिव होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति को AIDS हो गया है।
आधुनिक उपचार से HIV को नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित ART लेने पर वायरस का स्तर इतना कम किया जा सकता है कि जांच में उसका पता न चले। लगातार वायरल लोड जांच में स्तर दबा हुआ रहने पर व्यक्ति यौन संबंध के माध्यम से HIV अपने साथी को नहीं फैलाता। इसे U=U यानी Undetectable = Untransmittable कहा जाता है। इसके लिए नियमित उपचार और चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है।
संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?
- इंजेक्शन या नशीले पदार्थों के इस्तेमाल में कभी भी सुई और सिरिंज साझा न करें।
- टैटू बनवाते समय स्टेराइल उपकरणों का इस्तेमाल सुनिश्चित करें।
- यौन संबंध के दौरान कंडोम का सही इस्तेमाल करें।
- संभावित जोखिम होने पर डॉक्टर की सलाह से HIV जांच कराएं।
- हाल ही में संभावित जोखिम हुआ हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। HIV से बचाव की PEP दवा 72 घंटे के भीतर शुरू की जानी चाहिए; जितनी जल्दी शुरू हो, उतना बेहतर है।
- HIV पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर उपचार में देरी न करें और ART सेंटर से संपर्क करें।



