रियाद/सना: मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव के बीच सऊदी अरब और यमन के हौथी विद्रोहियों के बीच टकराव एक बार फिर चर्चा में है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, मक्का और मदीना के क्षेत्रों की ओर आने वाली दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया गया। इसके बाद मिसाइलों के टुकड़े सऊदी अरब के कई इलाकों में गिरने की जानकारी सामने आई। दूसरी ओर, हौथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दोनों पवित्र शहरों को निशाना बनाने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
हौथियों का कहना है कि उनकी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठान और सैन्य ठिकाने थे। इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा, हवाई यातायात और तेल आपूर्ति से जुड़े सवालों को फिर से महत्वपूर्ण बना दिया है।
मक्का-मदीना के क्षेत्र में क्या हुआ?
सऊदी अरब के नागरिक सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के बाद उनके मलबे के अलग-अलग स्थानों पर गिरने की सूचना मिली। इनमें मक्का क्षेत्र के वादी अल-मुगम्मस के अलावा जेद्दा, ताइफ और राबिग के कुछ इलाके शामिल बताए गए।
मक्का और मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में गिने जाते हैं। मक्का में काबा और मस्जिद अल-हरम स्थित हैं, जबकि मदीना में पैगंबर की मस्जिद है। दुनियाभर से लाखों श्रद्धालु इन शहरों में आते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों के आसपास मिसाइलों के मलबे की खबर सामने आने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। सऊदी अधिकारियों ने मिसाइलों को रोकने और मलबा गिरने की जानकारी दी, जबकि हौथियों ने पवित्र शहरों को निशाना बनाने से इनकार किया है। उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं होता कि मिसाइलों का वास्तविक लक्ष्य क्या था या उनके सभी निर्धारित लक्ष्य प्रभावित हुए थे या नहीं।
याह्या सरी ने क्या कहा?
हौथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सऊदी अरब के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उनके संगठन की कार्रवाई मक्का और मदीना के खिलाफ नहीं थी। संगठन ने दावा किया कि उसके हमले सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों पर केंद्रित थे।
हौथियों का कहना है कि जब वे कोई सैन्य कार्रवाई करते हैं तो उसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से देते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब सऊदी अरब ने मिसाइलों को रोकने और अलग-अलग इलाकों में मलबा गिरने की सूचना दी थी।
दोनों पक्षों के बयानों में अंतर के कारण घटना के लक्ष्य और वास्तविक नुकसान को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसलिए आरोपों और दावों को स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्यों से अलग समझना जरूरी है।

सऊदी अरब के किन ठिकानों को निशाना बनाने का दावा?
याह्या सरी ने दावा किया कि हौथी बलों ने सऊदी अरब के कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इनमें रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, यानबू स्थित अरामको का एक प्रतिष्ठान, राबिग तेल रिफाइनरी, कच्चे तेल की पंपिंग सुविधाएं और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन शामिल हैं।
उन्होंने दमाम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नजरान के एक हवाई अड्डे और खमीस मुशैत स्थित एक एयरबेस को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया।
दूसरी ओर, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यानबू और ताइफ की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने की जानकारी दी। हालांकि, रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं था कि हौथियों द्वारा बताए गए सभी ठिकानों पर हमले सफल हुए या कुछ हमलों को बीच में ही रोक दिया गया।
इसलिए इन दावों को अंतिम रूप से पुष्ट सैन्य परिणाम मानना उचित नहीं होगा।
रियाद के हवाई अड्डे को लेकर भी बढ़ी चिंता
इस घटनाक्रम के बीच रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को लेकर भी तनाव बना हुआ है। हौथी प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि उनके संगठन की नजर में यह हवाई अड्डा सैन्य लक्ष्य बना हुआ है। उन्होंने एयरलाइंस, हवाई अड्डे के कर्मचारियों और यात्रियों से वहां जाने को लेकर सावधानी बरतने की अपील की।
सऊदी अधिकारियों ने 25 अक्टूबर से हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 को घरेलू उड़ानों और टर्मिनल-2 को राष्ट्रीय विमानन कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इस्तेमाल करने की व्यवस्था की जानकारी दी थी।
इससे पहले अक्टूबर में हमले के बाद हवाई अड्डे का संचालन प्रभावित हुआ था। ऐसे माहौल में विमानन सेवाओं की सुरक्षा और यात्रियों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।
हालांकि, यात्रियों को अपनी उड़ानों की स्थिति और यात्रा संबंधी निर्देशों की पुष्टि संबंधित एयरलाइन तथा हवाई अड्डे की आधिकारिक सूचना से करनी चाहिए।
यमन के अदन में भी हमलों की खबर
तनाव केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहा। यमन के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने आरोप लगाया कि हौथियों ने दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में तटरक्षक बल के प्रतिष्ठानों पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
सरकार के गृह मंत्रालय के अनुसार, दो मिसाइलें तटरक्षक मुख्यालय पर गिरीं, जबकि तीसरी तवाही जिले में स्थित तटरक्षक बल की एक इमारत से टकराई।
हौथी प्रवक्ता ने इसके जवाब में दावा किया कि उनके बलों ने अदन में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़ों और एक नौसैनिक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन स्थानों पर सऊदी अधिकारी सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे।
इन दावों पर सभी संबंधित पक्षों की ओर से समान स्तर की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए अदन में हुई घटनाओं के बारे में भी आधिकारिक आरोपों और सत्यापित जानकारी के बीच अंतर रखना जरूरी है।
2022 के युद्धविराम पर फिर मंडराया खतरा
सऊदी अरब और हौथी विद्रोहियों के बीच मौजूदा टकराव ने वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। इस समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच सीमा पार हमलों में काफी हद तक कमी आई थी।
सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि हौथियों का राजधानी सना सहित देश के बड़े उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण है।
अब तेल प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों को लेकर सामने आ रहे दावों से संघर्ष के और फैलने की आशंका पैदा हो रही है। यदि हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ विमानन और तेल परिवहन पर भी पड़ सकता है।
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन उसके तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है। लाल सागर की दिशा में तेल पहुंचाने वाले मार्गों या आसपास के समुद्री परिवहन में बाधा आने पर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ सकती है। हालांकि, इन घटनाओं के कारण तेल आपूर्ति पर कितना वास्तविक प्रभाव पड़ा है, इसका आकलन पुष्ट आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि सऊदी अरब और हौथी विद्रोहियों के बीच यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहता है या फिर बड़े संघर्ष में बदलता है। मक्का और मदीना के आसपास मिसाइलों के मलबे की खबरों के बीच सऊदी सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर बनी हुई है।
दूसरी ओर, हौथियों द्वारा तेल प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाने के दावे बताते हैं कि संघर्ष में रणनीतिक बुनियादी ढांचे की भूमिका बढ़ रही है। यदि ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो आम नागरिकों, यात्रियों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है।
अगले घटनाक्रम को समझने के लिए सऊदी अधिकारियों की आगे की घोषणाओं, हौथी नेतृत्व के बयानों और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी पर नजर रखना जरूरी होगा।



