विंडहोक | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नामीबिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान राजकीय सम्मान के साथ 21 तोपों की सलामी दी गई। यह स्वागत राजधानी विंडहोक के स्टेट हाउस में नामीबिया की महिला राष्ट्रपति डॉ. नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह द्वारा किया गया। यह यात्रा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि 27 वर्षों के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री नामीबिया की भूमि पर पहुंचे हैं।
सांस्कृतिक समन्वय का अद्भुत दृश्य: पीएम मोदी ने बजाया ढोल
एयरपोर्ट पर उतरते ही प्रधानमंत्री मोदी ने ना सिर्फ गर्मजोशी से स्वागत स्वीकारा, बल्कि वहां मौजूद स्थानीय कलाकारों के साथ ढोल भी बजाया, जिससे भारत-नामीबिया की सांस्कृतिक मित्रता का जीवंत प्रदर्शन हुआ। इस अनोखे दृश्य ने वहां मौजूद भारतीय प्रवासी समुदाय और नामीबियाई नागरिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भारत-नामीबिया संबंधों में नया अध्याय
पीएम मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, खनिज, जैवविविधता संरक्षण और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में कई अहम विषयों पर चर्चा की जा रही है। नामीबिया की राष्ट्रपति ने भारत को एक सच्चा और दीर्घकालिक सहयोगी बताते हुए द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।
‘हीरोज एकर’ पर दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री मोदी ने नामीबिया के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की याद में बनाए गए राष्ट्रीय स्मारक ‘हीरोज एकर’ पर जाकर देश के संस्थापक डॉ. सैम नुजोमा को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह भावनात्मक क्षण दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को एक नई गहराई देता है।
संसद को करेंगे संबोधित, भारतीय समुदाय से मिलेंगे
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी नामीबिया की संसद को भी संबोधित करेंगे और वहां रहने वाले भारतीय प्रवासी समुदाय से संवाद भी करेंगे। इसके अलावा ‘प्रोजेक्ट चीता 2’ पर भी चर्चा संभावित है, जिससे भारत में नामीबिया से और अधिक चीतों को लाने की योजना को बल मिलेगा।
भारत-अफ्रीका रिश्तों में नया संकल्प
भारत के उच्चायुक्त राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि यह यात्रा ग्लोबल साउथ में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को मजबूती देती है। भारत और नामीबिया के बीच बढ़ते संबंधों से आने वाले वर्षों में ऊर्जा, खनिज और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होगा।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक पहल नहीं, बल्कि संस्कृति, सहयोग और सामरिक संबंधों के एक मजबूत सेतु का प्रतीक बन गई है। 21 तोपों की सलामी और ढोल की थाप के साथ भारत और नामीबिया के संबंधों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

