लखनऊ: में सड़क सुरक्षा को लेकर एक अहम पहल की गई है। परिवहन विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में युवाओं को ट्रैफिक नियमों और सड़क पर सुरक्षित व्यवहार के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। यह कार्यशाला शहर के प्रमुख स्थल इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल में आयोजित हो रही है, जहां बड़ी संख्या में युवा प्रतिभागी उत्साह के साथ हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यशाला का उद्देश्य सिर्फ नियमों की जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं को सड़क सुरक्षा का ‘ब्रांड एंबेसडर’ बनाना है, ताकि वे समाज में जागरूकता फैला सकें।
युवाओं ने साझा किए अपने विचार
कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों ने सड़क सुरक्षा को लेकर अपनी जिम्मेदारी को समझा। प्रतिभागी अंशिका पटेल ने कहा कि सड़क पर ट्रैफिक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। वहीं आयुष राजपूत ने बताया कि अगर हर व्यक्ति नियमों का पालन करे तो सड़क हादसों में काफी कमी लाई जा सकती है।
युवाओं का मानना है कि अक्सर लोग छोटी-छोटी लापरवाहियों के कारण बड़े हादसों का शिकार हो जाते हैं, जिन्हें सही जागरूकता से रोका जा सकता है।
परिवहन मंत्री ने किया उद्घाटन
इस कार्यशाला का उद्घाटन दयाशंकर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सड़क सुरक्षा सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे खुद भी नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
75 जिलों से पहुंचे प्रतिभागी
कार्यशाला में प्रदेश के 75 जिलों से चार-चार प्रशिक्षुओं को आमंत्रित किया गया है। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि इसमें स्काउट-गाइड के छात्र-छात्राओं को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि अगर युवा वर्ग इस अभियान से जुड़ता है, तो सड़क सुरक्षा का संदेश गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंच सकता है।

विशेषज्ञ देंगे प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
इस कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ रोहित बालूजा युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे ट्रैफिक मैनेजमेंट, सुरक्षित ड्राइविंग व्यवहार और दुर्घटनाओं से बचाव के व्यावहारिक तरीकों पर विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क हादसों का बड़ा कारण तेज गति, शराब पीकर ड्राइविंग और नियमों की अनदेखी है। इन पर नियंत्रण पाने के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है।
दुर्घटनाओं में कमी लाने की पहल
परिवहन विभाग का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम सड़क हादसों में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जब युवा खुद जागरूक होंगे, तो वे अपने परिवार और समाज को भी जागरूक करेंगे।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को हेलमेट के महत्व, सीट बेल्ट के उपयोग, स्पीड लिमिट और सड़क संकेतों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही, उन्हें यह भी बताया जा रहा है कि दुर्घटना की स्थिति में कैसे सही कदम उठाए जाएं।
भविष्य की योजना
इस पहल को आगे भी जारी रखने की योजना है। विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक युवाओं को इस तरह के प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, ताकि सड़क सुरक्षा एक जन आंदोलन बन सके।

