‘भारत कोई धर्मशाला नहीं’… राम कथा से CM योगी का बड़ा संदेश, खर-दूषण और मारीच का जिक्र कर साधा निशाना

लखनऊ: में नौ दिनों तक चले रामभद्राचार्य की राम कथा महोत्सव का मंगलवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए और अपने संबोधन में राम मंदिर आंदोलन, सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे।

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम केवल आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि पूरे भारत को जोड़ने वाली शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत की संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों का सम्मान नहीं करते, उनके लिए यह देश धर्मशाला नहीं हो सकता।

भगवान राम सभी को जोड़ने वाले आदर्श

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान राम का नाम उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे देश को एक सूत्र में बांधने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भारतीय संस्कृति और आदर्श जीवन के सर्वोच्च प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि राम केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि भारतीय समाज की एकता, कर्तव्य और नैतिक मूल्यों का आधार भी हैं।

राम मंदिर आंदोलन का किया उल्लेख

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लंबे संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राम भक्तों ने सदियों तक संघर्ष किया और अंततः न्यायिक प्रक्रिया के बाद राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

योगी ने कहा कि वर्षों तक चले आंदोलन के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 2019 में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया और यह स्वीकार किया कि जहां रामलला विराजमान हैं, वही राम जन्मभूमि है।

उन्होंने इस दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य के योगदान का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके विचारों और प्रस्तुत तथ्यों ने इस विषय पर व्यापक चर्चा को दिशा दी।

नारी सम्मान और सामाजिक जागरूकता पर जोर

मुख्यमंत्री ने रामायण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम का जीवन नारी सम्मान और उसकी गरिमा की रक्षा का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा कि समाज को महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति लगातार जागरूक रहने की आवश्यकता है। योगी ने कहा कि परिवार और समाज दोनों स्तरों पर मूल्यों को मजबूत करना समय की मांग है।

लव जिहाद और जनसंख्या संतुलन का मुद्दा

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने लव जिहाद और धार्मिक जनसांख्यिकीय बदलाव जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा भी समय-समय पर चिंता व्यक्त की गई है।

योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 में धर्मांतरण से जुड़े मामलों को रोकने के लिए विशेष कानून लागू किया था। उन्होंने कहा कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।

‘नकारात्मक ताकतों से सतर्क रहना होगा’

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास के हर दौर में ऐसी शक्तियां मौजूद रही हैं जो समाज को बांटने या कमजोर करने का प्रयास करती हैं। उन्होंने लोगों से सामाजिक एकता बनाए रखने और ऐसी चुनौतियों का मिलकर सामना करने का आह्वान किया।

रामायण के पात्रों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब भी नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं, तो वे समाज और संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करती हैं। ऐसे समय में समाज को सजग और संगठित रहने की जरूरत होती है।

लैंड जिहाद का भी किया जिक्र

योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में लैंड जिहाद शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अवैध कब्जों और भूमि से जुड़े विवादों के खिलाफ समाज को जागरूक रहने की आवश्यकता है।

उन्होंने रामायण के कुछ प्रसंगों का संदर्भ देते हुए कहा कि इतिहास और धार्मिक ग्रंथ समाज को सजग रहने की सीख देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

लखनऊ में रामभद्राचार्य की राम कथा के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन, सांस्कृतिक मूल्यों, नारी सम्मान, सामाजिक जागरूकता और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अपनी सरकार और समाज के दृष्टिकोण को सामने रखा। उनके बयान अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top