“देवरिया में गूंजे साहित्य के सुर: ‘जाग रे पंछी’ के विमोचन ने जीता दिल, कवियों की रचनाओं पर देर तक बजती रहीं तालियां”

रिपोर्ट – अरविंद शर्मा

देवरिया: की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था नागरी प्रचारिणी सभा के तत्वावधान में आयोजित द्वितीय रविवारीय कवि गोष्ठी एवं पुस्तक विमोचन समारोह ने साहित्य प्रेमियों को एक यादगार अनुभव दिया। कार्यक्रम में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे प्रतिष्ठित कवियों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विदुषी क्षमा श्रीवास्तव और प्रख्यात गीतकार रामेश्वर तिवारी ‘राजन’ द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया।

कवियों ने शब्दों से रचा भावनाओं का संसार

कार्यक्रम का संचालन कवयित्री प्रीति पाण्डेय ने प्रभावशाली अंदाज में किया। काव्य पाठ की शुरुआत छेदी प्रसाद गुप्त ‘विवश’ ने एक सैनिक की पत्नी की भावनाओं पर आधारित मार्मिक कविता से की, जिसने श्रोताओं की आंखें नम कर दीं।

गोरखपुर से आए वरिष्ठ साहित्यकार मुक्तिनाथ त्रिपाठी ने अपनी रचना ‘जमींदोज वही, वट वृक्ष वही’ के माध्यम से जीवन के गूढ़ सत्य प्रस्तुत किए। वहीं सुप्रसिद्ध गजलकारा अंजलि अरोड़ा ‘खुशबू’ ने अपनी आध्यात्मिक गजल ‘पुकारूं तुमको, बिना पुकारे तेरे इशारे’ सुनाकर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पार्वती देवी ‘गौरा’ ने पर्यावरण और बदलते मौसम पर आधारित गीत ‘जलती धरा गगन है’ प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। ताज मुहम्मद सिद्दीकी ने समय के महत्व पर आधारित गजल के माध्यम से जीवन के अनमोल क्षणों का महत्व समझाया।

व्यंग्य और समसामयिक मुद्दों पर भी चली कलम

जाने-माने व्यंग्यकार योगेन्द्र तिवारी ‘योगी’ ने अपनी व्यंग्य रचना ‘लोग बेमौत मर रहे महंगाई में’ के जरिए वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों पर तीखा कटाक्ष किया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न साहित्यकारों ने देश, समाज, संस्कृति, पर्यावरण और मानवीय मूल्यों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिससे पूरा सभागार साहित्यिक रस में डूबा नजर आया।

‘जाग रे पंछी’ का हुआ भव्य विमोचन

समारोह का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक क्षण तब आया जब सुप्रसिद्ध कवयित्री अंजनी द्विवेदी की नई काव्य कृति ‘जाग रे पंछी’ का लोकार्पण किया गया।

पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि महेंद्र राय, विशिष्ट अतिथि एवं खंड शिक्षा अधिकारी गोपाल मिश्र, कार्यक्रम अध्यक्ष इंद्र कुमार दीक्षित, संस्था मंत्री डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी तथा वरिष्ठ साहित्यकार सरोज कुमार पाण्डेय ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर अंजनी द्विवेदी ने कहा कि लेखन उनके लिए केवल अभिव्यक्ति नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम है। उन्होंने घोषणा की कि पुस्तक बिक्री से प्राप्त होने वाली पूरी राशि समाज कल्याण एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए समर्पित की जाएगी।

साहित्यकारों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में ‘मानवदीप सेवा संस्थान’ की ओर से दो दर्जन से अधिक साहित्यकारों, कवियों और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित विभूतियों में डॉ. शकुंतला दीक्षित, रंजना श्रीवास्तव, प्रार्थना राय, प्रियंवदा पाण्डेय, डॉ. अभय कुमार द्विवेदी, जगदीश उपाध्याय, रमिता जायसवाल सहित अनेक साहित्यकार शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त ‘काव्यांगन संस्था’ की ओर से भी वरिष्ठ पदाधिकारियों को उत्तरीय भेंट कर सम्मान प्रदान किया गया।

हिंदी और देवनागरी के उत्थान में अहम भूमिका

मुख्य अतिथि महेंद्र राय ने अपने संबोधन में कहा कि नागरी प्रचारिणी सभा हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के संरक्षण एवं संवर्धन में ऐतिहासिक योगदान दे रही है। उन्होंने संस्था के पदाधिकारियों और साहित्यकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रियंवदा पाण्डेय, नीरजा सिंह और कौशल किशोर मणि सहित अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को साहित्यिक आनंद प्रदान किया।

देवरिया में आयोजित यह साहित्यिक समारोह केवल एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम नहीं था, बल्कि हिंदी साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों का जीवंत उत्सव बन गया। ‘जाग रे पंछी’ के विमोचन के साथ साहित्यकारों की रचनात्मक ऊर्जा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी सामने आई। कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि साहित्य आज भी समाज को दिशा देने की शक्ति रखता है।

 

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