क्या 2200 साल पहले सम्राट विक्रमादित्य ने बनवाई थी हनुमानगढ़ी? स्कंद पुराण के हवाले से किया गया बड़ा दावा

आचार्य संजय तिवारी
अयोध्या:
श्री हनुमानगढ़ी मंदिर के इतिहास को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। आचार्य संजय तिवारी द्वारा प्रस्तुत एक विस्तृत लेख में दावा किया गया है कि अयोध्या स्थित श्री हनुमानगढ़ी का मूल मंदिर स्वरूप लगभग 2200 वर्ष पूर्व महान सम्राट विक्रमादित्य ने बनवाया था। लेख में स्कंद पुराण, अयोध्या माहात्म्य तथा अन्य प्राचीन वैदिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि हनुमानगढ़ी का अस्तित्व अत्यंत प्राचीन है और इसे किसी मध्यकालीन शासक द्वारा निर्मित बताना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं है।

लेख के अनुसार, स्कंद पुराण के वैष्णव खंड और अयोध्या माहात्म्य में अयोध्या में स्थित श्रीहनुमान जी के तपस्थल और गुफा का उल्लेख मिलता है। दावा किया गया है कि भगवान श्रीराम के साकेत गमन के बाद हनुमान जी को अयोध्या की रक्षा का दायित्व सौंपा गया था और तभी से वे इस पवित्र नगरी के रक्षक माने जाते हैं।

आचार्य संजय तिवारी के अनुसार, स्कंद पुराण में वर्णित श्लोकों के आधार पर हनुमान जी को “अयोध्या का रक्षक” बताया गया है। लेख में उल्लेख है कि भगवान श्रीराम ने स्वयं हनुमान जी से कहा था कि वे चिरकाल तक अयोध्या की रक्षा करें। इसी कारण आज भी अयोध्या में यह परंपरा है कि रामलला के दर्शन से पहले श्रद्धालु हनुमानगढ़ी में दर्शन करते हैं।

लेख में यह भी दावा किया गया है कि जब उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने अयोध्या का पुनरुद्धार कराया, तब उन्होंने 360 मंदिरों के साथ हनुमानगढ़ी को भी वर्तमान स्वरूप में विकसित कराया। बताया गया है कि मंदिर का निर्माण एक ऊंचे टीले पर किलेनुमा शैली में कराया गया, जिससे आगे चलकर यह स्थान “हनुमानगढ़ी” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

हनुमानगढ़ी की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह मंदिर अयोध्या के मध्य स्थित ऊंचे टीले पर बना है, जहां पहुंचने के लिए लगभग 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर के गर्भगृह में बाल स्वरूप हनुमान जी अपनी माता अंजनी की गोद में विराजमान हैं, जो देश के अन्य हनुमान मंदिरों से इसे अलग पहचान देता है।

लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि हनुमानगढ़ी और रामजन्मभूमि के बीच प्राचीन गुप्त सुरंगों की मान्यता प्रचलित है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में किसी आधुनिक पुरातात्विक अध्ययन का उल्लेख नहीं किया गया है।

इतिहास को लेकर चल रही बहस पर भी लेख में टिप्पणी की गई है। इसमें कहा गया है कि हनुमानगढ़ी के निर्माण को किसी नवाब या इस्लामी शासक से जोड़ने का दावा ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं है। लेख में इस संबंध में उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों और प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन का हवाला देते हुए इस नैरेटिव को चुनौती दी गई है।

साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि स्कंद पुराण के अनुसार अयोध्या भगवान विष्णु की आदिपुरी है, जहां सरयू नदी का विशेष महत्व बताया गया है। अयोध्या को ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र के संयुक्त स्वरूप का प्रतीक बताते हुए इसकी धार्मिक महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है।

हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि हनुमानगढ़ी के इतिहास को लेकर विभिन्न इतिहासकारों, धार्मिक परंपराओं और शोधकर्ताओं के अलग-अलग मत हैं। उपलब्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्रोतों में कई दावों पर भिन्न दृष्टिकोण भी मिलते हैं। ऐसे में इस विषय पर प्रस्तुत दावों को संबंधित लेखक के विचार और उनके द्वारा उद्धृत धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या के रूप में देखा जाना चाहिए।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top