पानीपत: यूपी और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों के पानीपत रेलवे स्टेशन पर ठहराव तथा त्योहारों के सीजन में विशेष ट्रेनें चलाने की मांग को लेकर पूर्वांचल समाज का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को छठे दिन भी जारी रहा। समाज के लोगों का कहना है कि लंबे समय से यात्रियों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। त्योहारों के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग पानीपत और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से अपने घरों की ओर लौटते हैं।
धरने पर बैठे लोगों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों को लेकर ठोस समाधान या आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
छठे दिन भी डटे रहे प्रदर्शनकारी
पूर्वांचल समाज के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने पानीपत रेलवे स्टेशन पर लगातार छठे दिन धरना दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यूपी और बिहार जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का पानीपत स्टेशन पर ठहराव नहीं होने के कारण यात्रियों को दूसरे स्टेशनों तक जाना पड़ता है।
त्योहारों के समय स्थिति और मुश्किल हो जाती है। छठ पूजा, दीपावली और अन्य पर्वों के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार अपने गांव और शहरों की ओर जाते हैं। ऐसे में नियमित ट्रेनों में भारी भीड़ रहती है और यात्रियों को टिकट, सीट और यात्रा से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
समाज की मांग है कि त्योहारों के दौरान अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाए।
विपक्षी दलों और संगठनों ने दिया समर्थन
धरने को विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है। बुधवार को कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी और सीपीएम से जुड़े नेताओं के अलावा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि धरना स्थल पर पहुंचे।
समर्थन देने पहुंचे नेताओं और संगठन प्रतिनिधियों ने पूर्वांचल समाज की मांगों को जायज बताते हुए सरकार और रेलवे प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने हालांकि यह सवाल भी उठाया कि आंदोलन के छह दिन बीत जाने के बावजूद भाजपा के कुछ नगर निगम पार्षदों और पदाधिकारियों को छोड़कर कोई बड़ा जनप्रतिनिधि—जैसे विधायक, सांसद या मंत्री—धरना स्थल पर समर्थन अथवा ठोस आश्वासन देने नहीं पहुंचा है।

औद्योगिक शहर में पूर्वांचल समाज की बड़ी भूमिका
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पानीपत के औद्योगिक विकास में पूर्वांचल समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। बड़ी संख्या में यूपी और बिहार से आए लोग पानीपत के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में काम करते हैं और शहर की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं।
उनका कहना है कि जब बड़ी संख्या में लोग रेलवे से यात्रा करते हैं तो पानीपत स्टेशन पर महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव से यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ रेलवे की आमदनी में भी वृद्धि हो सकती है।
नेताओं ने कहा कि यह मांग केवल पूर्वांचल समाज तक सीमित नहीं है। यदि महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव पानीपत में होता है तो इसका लाभ शहर में रहने वाले अन्य यात्रियों को भी मिलेगा।
त्योहारों में बढ़ जाती है यात्रियों की परेशानी
पूर्वांचल समाज के लोगों का कहना है कि त्योहारों के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। खासकर छठ पूजा के समय बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की तरफ जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिलती है।
ऐसे में विशेष ट्रेनों का संचालन यात्रियों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बन सकता है। समाज का कहना है कि रेलवे को पहले से ही त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त ट्रेनों की योजना बनानी चाहिए, ताकि यात्रियों को परेशानी न हो।
मांग पूरी होने तक जारी रहेगा धरना
पूर्वांचल समाज के प्रधान उमा शंकर राय ने कहा कि समाज की ओर से दिन-रात अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रेनों के ठहराव और त्योहारों के सीजन में स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग को लेकर समाज पीछे हटने वाला नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।
उनके अनुसार, समाज का उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान कराना है।

ये लोग रहे मौजूद
धरने के दौरान श्री गुरु शिवाधर दुबे ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज, शक्ति भक्ति धाम के परशुराम महाराज, दयानंद यादव, राजू श्रीवास्तव, अवधेश यादव, रोहित सिंह, अमन कुमार, आनंद प्रकाश, पीएन सिंह, मनोज सिंह, अनिकेत पांडेय, मधु शुक्ला, पूनम रामदेव और पूनम कश्यप समेत कई लोग मौजूद रहे।
समाज के लोगों ने आंदोलन को लगातार आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने की बात कही है।
अब रेलवे और सरकार के रुख पर नजर
छठे दिन भी धरना जारी रहने के बाद अब सभी की नजर रेलवे प्रशासन और सरकार की ओर है। प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
अगर ट्रेनों के ठहराव और त्योहारों के दौरान विशेष ट्रेनों को लेकर कोई ठोस घोषणा होती है तो इससे पानीपत में रहने वाले यूपी-बिहार के हजारों यात्रियों को राहत मिल सकती है। वहीं, यदि समाधान नहीं निकलता है तो पूर्वांचल समाज का आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।



