लखनऊ | राजधानी लखनऊ के हैदर कैनाल इलाके में प्रस्तावित एलिवेटेड पुल निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार को हैदर कैनाल कल्याण समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने चौपाल में भाग लिया और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर चिंता जाहिर की। स्थानीय निवासियों ने पुल का बजट बढ़ने को ‘बहानेबाजी’ करार देते हुए कहा कि सरकार हमारी बस्ती की बलि देना चाहती है।
विकास की आड़ में उजाड़ने की तैयारी?
चौपाल में मौजूद सैकड़ों स्थानीय लोगों ने एक स्वर में कहा कि हैदर कैनाल क्षेत्र की कॉलोनियां कई दशक पुरानी हैं और यहां हजारों परिवार रहते हैं।
“हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन यदि विकास के नाम पर हमारी छतें छीनी जा रही हैं तो यह अन्याय है।”
पुल निर्माण का बजट बढ़ा, विस्थापन की आशंका बढ़ी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले जिस बजट में पुल बनना था, उसमें अचानक अत्यधिक वृद्धि कर दी गई है। इससे लोगों को आशंका है कि इसके तहत अवैध कब्जे के नाम पर बुलडोजर चलाने की योजना है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से करेंगे मुलाकात
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि स्थानीय प्रतिनिधियों का एक समूह जल्द ही रक्षा मंत्री और सांसद राजनाथ सिंह से मुलाकात करेगा और उन्हें जनता की व्यथा से अवगत कराएगा।
“हमें उम्मीद है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते राजनाथ सिंह हमारी आवाज को सुनेंगे और उचित कदम उठाएंगे।”
क्या बोले स्थानीय निवासी?
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रामस्वरूप यादव (70), रिटायर्ड शिक्षक – “यह कॉलोनी 40 साल पुरानी है, अब अचानक इसे अतिक्रमण कहकर उजाड़ा जा रहा है। हम कहां जाएं?”
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नसीम अहमद (व्यवसायी) – “हमारी दुकानें ही रोजी-रोटी का जरिया हैं, पुल से हमें फायदा नहीं बल्कि नुकसान होगा।”
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सीमा देवी (गृहिणी) – “हमारे बच्चे स्कूल जाते हैं, अब घर टूटेगा तो क्या सड़कों पर रहेंगे?”
प्रशासन क्या कहता है?
हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार पुल के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है। हालांकि, विरोध को देखते हुए अधिकारियों ने फिलहाल कोई तिथि तय नहीं की है।
हैदर कैनाल ब्रिज योजना का विवाद
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प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज का कार्य 2024 में मंजूर हुआ था।
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पुल का उद्देश्य ट्रैफिक सुगमता और आउटर रिंग से जोड़ना है।
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पहले ₹120 करोड़ का प्रस्तावित बजट, अब ₹185 करोड़ बताया जा रहा है।
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300+ मकानों और दुकानों पर प्रभाव का अंदेशा।
निष्कर्ष
हैदर कैनाल का मामला केवल पुल निर्माण का नहीं, बल्कि विकास बनाम विस्थापन की बहस बन चुका है। प्रशासन को चाहिए कि वह जन संवाद को प्राथमिकता दे और विकास योजनाओं को जन-संवेदनशील बनाकर लागू करे।



