मुंबई | उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आधारित बायोपिक फिल्म ‘अजय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी’ की रिलीज को लेकर विवाद गहरा गया है। फिल्म के मेकर्स ने सेंसर बोर्ड (CBFC) पर जानबूझकर देरी और मनमानी का आरोप लगाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दो दिन में मांगा जवाब
याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBFC को दो दिन में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर क्यों फिल्म की सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को बार-बार टाला जा रहा है।
मेकर्स बोले- सेंसर बोर्ड कर रहा है राजनीतिक भेदभाव
फिल्म के निर्माता-निर्देशक ने हाईकोर्ट में दलील दी कि
“CBFC द्वारा सर्टिफिकेशन के लिए सभी जरूरी कागजात और फिल्म की स्क्रीनिंग पूरी कर दी गई है। इसके बावजूद फिल्म को अनुमति नहीं दी जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक दवाब और भेदभाव से प्रेरित लगती है।”
क्या है फिल्म ‘अजय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी’?
फिल्म उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साधु से सीएम बनने तक की यात्रा को दर्शाती है। फिल्म में उनके जवानी के दिनों से लेकर राजनीति में प्रवेश और गोरखपीठ के महंत बनने तक की कहानी को दिखाया गया है।
इस फिल्म का ट्रेलर पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसमें ‘अजय’ नामक युवक की आध्यात्मिक और राजनीतिक संघर्ष को दिखाया गया है।
सेंसर बोर्ड की आपत्तियों पर मेकर्स का पलटवार
CBFC ने अब तक आधिकारिक रूप से कोई आपत्ति नहीं जताई है, लेकिन फिल्म से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, फिल्म के कंटेंट को लेकर ‘संवेदनशीलता’ की बात कहकर निर्णय को टाला जा रहा है।
मेकर्स का कहना है कि,
“जब देश में कई राजनीतिक बायोपिक रिलीज हो चुकी हैं, तो योगी जी की बायोपिक को ही क्यों रोका जा रहा है?”
अब आगे क्या?
बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यह मामला गरमाता जा रहा है। अगर सेंसर बोर्ड संतोषजनक जवाब नहीं देता, तो कोर्ट फिल्म की रिलीज के पक्ष में आदेश दे सकता है। फिल्म के निर्देशक का कहना है कि वे जल्द ही इसे रिलीज करना चाहते हैं ताकि जनता सच्चाई जान सके।



