आज (6 सितंबर): अनंत चतुर्दशी 2025 का पावन पर्व है। यह दिन गणेश उत्सव का अंतिम दिन होता है।
भक्तजन आज बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ अपने गणपति बप्पा का विसर्जन करेंगे। धार्मिक मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व होता है।
गणपति विसर्जन के 5 शुभ मुहूर्त
पंडितों के अनुसार, सुबह से लेकर सूर्यास्त तक कुल 5 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इनमें भक्त अपनी सुविधा के अनुसार प्रतिमा का विसर्जन कर सकते हैं। ध्यान रखें कि विसर्जन सूर्यास्त से पहले ही किया जाना चाहिए।
- प्रातःकाल मुहूर्त – 6:15 AM से 8:00 AM
- सुबह का मुहूर्त – 9:00 AM से 11:15 AM
- मध्याह्न मुहूर्त – 12:00 PM से 1:30 PM
- अपराह्न मुहूर्त – 3:00 PM से 4:30 PM
- संध्या मुहूर्त – 5:00 PM से 6:30 PM
पूजा और विसर्जन की विधि
- सबसे पहले घर या पंडाल में गणपति जी की अंतिम आरती और पूजा करें।
- भगवान को मोदक, फल और पुष्प अर्पित करें।
- परिवारजन और भक्त मिलकर “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे लगाएं।
- प्रतिमा को स्वच्छ जल में या निर्धारित कृत्रिम तालाब/जलाशय में विसर्जित करें।
- विसर्जन के समय गणपति से पुनः अगले वर्ष आने की प्रार्थना करें।
अनंत चतुर्दशी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के “अनंत रूप” की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। इस दिन “अनंत सूत्र” बांधने की परंपरा भी है, जिससे परिवार में सौहार्द और खुशहाली बनी रहती है।
गणेश उत्सव का समापन
गणेश उत्सव की शुरुआत गणेश चतुर्थी पर होती है और यह 10 दिन बाद अनंत चतुर्दशी को समाप्त होता है। इस दौरान भक्त गणपति जी को अपने घरों और पंडालों में स्थापित कर उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं।



