लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मोहनलालगंज क्षेत्र के धनुवासाड़ गांव में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां सुरेश कुमार यादव का इकलौता बेटा यश कुमार (14 वर्ष) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यश निजी स्कूल में कक्षा 6 का छात्र था और परिवारिक तौर पर किसान परिजन से संबंधित था। घटना की खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
ऑनलाइन गेम की लत और भारी वित्तीय नुकसान
जानकारी के अनुसार, यश कुमार ऑनलाइन गेम खेलते समय लगभग 13 लाख रुपये का नुकसान उठा चुका था। उसे यह गेम खेलने की आदत पिछले कुछ महीनों से हो गई थी। परिवार के अनुसार, यश लगातार गेम में हार का शिकार हो रहा था, लेकिन वह इसके बावजूद खेलता रहा। जब पिता सुरेश कुमार यादव ने उसे समझाने की कोशिश की और उसे रोका, तब भी यश का मन नहीं माना।
यश ने अत्यधिक मानसिक तनाव के चलते यह आत्मघाती कदम उठाया। ग्रामीणों के अनुसार, युवक की यह सोच गेम की हार और लगातार बढ़ती परेशानी की वजह से थी।
परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर
परिवार का कहना है कि यश बहुत होशियार और परिश्रमी छात्र था, लेकिन गेम की लत ने उसकी जान ले ली। पूरे मोहल्ले में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। आस-पास के लोगों ने बताया कि गेमिंग एडिक्शन के प्रति समय रहते सचेत न होने की वजह से यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई।
पुलिस ने किया मर्ग दर्ज, जांच जारी
मोहानलालगंज थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यश कुमार ने मानसिक तनाव में आकर यह कदम उठाया। आवश्यक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि ऑनलाइन गेम से संबंधित किन किन प्लेटफॉर्म्स का प्रयोग किया गया था।
विशेषज्ञों की चेतावनी
इस घटना पर विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। मनोवैज्ञानिक डॉ. रेखा वर्मा ने कहा, “ऑनलाइन गेम की लत आज की पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। माता-पिता को बच्चों पर नजर रखनी चाहिए, उनके मानसिक स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर पेशेवर सहायता लेनी चाहिए।”
निष्कर्ष:
यह दुखद घटना न केवल परिवार के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। डिजिटल युग में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य और खेलों के प्रति संतुलित नजरिया जरूरी है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए समय रहते जागरूकता अभियान और काउंसलिंग सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी किशोर इसी तरह का कदम न उठाए।



