
प्रो संजय द्विवेदी
भारत: के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बुधवार, 17 सितंबर को 75वां जन्मदिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। मोदी का व्यक्तित्व उनके संचार और संवाद की विशिष्टता का परिचायक रहा है। उनके संवाद से न केवल राजनीति की दिशा बदलती है, बल्कि देशवासियों के दिलों को जोड़ने की ताकत भी भर जाती है। प्रो. संजय द्विवेदी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की वाणी में माटी की महक है, जो देश के आम नागरिकों से गहराई से जुड़ती है।

संवाद की महारथी: राजनीति से परे लोकविमर्श का केंद्र
नरेंद्र मोदी का संवाद साधना सिर्फ चुनाव-उन्मुख नहीं है, बल्कि यह निरंतरता से देशवासियों के जीवन को बेहतर बनाने का एक प्रयास है। ‘मन की बात’ के माध्यम से वे देशवासियों से सीधे जुड़ते हैं। इसमें शिक्षा, सफाई, स्वास्थ्य, योग, स्वच्छता जैसी जीवन की आवश्यक बातें शामिल रहती हैं। इस संवाद शैली ने मोदी को एक ऐसे अभिभावक के रूप में स्थापित किया है, जो देश और नागरिकों की भलाई के लिए काम करता है।

संघर्ष, समर्पण और ईमानदारी की कहानी
गुजरात के बड़नगर कस्बे से निकलकर मोदी देश के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर प्रेरणादायक रहा है। बिना सांसद बने ही प्रधानमंत्री बनने का अनूठा रिकॉर्ड उनके राष्ट्रप्रेम, संकल्प और कड़ी मेहनत का परिचायक है। आमजन से संवाद करते हुए मोदी कभी अपने साधारण पृष्ठभूमि को छिपाते नहीं हैं। ‘चाय पर चर्चा’ से लेकर विभिन्न जनसभाओं तक उनकी संवाद शैली लोगों में विश्वास जगाती है। उनकी वाणी में आत्मविश्वास, सादगी और संप्रेषण का अनोखा तालमेल है।

लोकजागरण का लगातार अभियान
कोरोना काल में लोगों को एकजुट करने से लेकर हर सामाजिक और आर्थिक पहल के लिए उन्होंने जनता से जुड़ने के उपाय अपनाए। दीप जलाने, थाली बजाने जैसे छोटे लेकिन प्रभावी अभियान जनता के बीच सकारात्मक संदेश पहुंचाने का जरिया बने। सरकार की योजनाओं को जनता तक सहज और सरल भाषा में पहुंचाकर मोदी ने जन-सामान्य की भागीदारी सुनिश्चित की।

देहभाषा और स्थानीय प्रतीकों का उपयोग
मोदी देश के जिस हिस्से में जाते हैं, वहां की स्थानीय बोली, परिधान और प्रतीकों का सचेत उपयोग करते हैं। उनका हाफ कुर्ता, खादी जैकेट और सूती कपड़े आज एक स्टाइल स्टेटमेंट बन चुके हैं। यह न केवल फैशन का हिस्सा है, बल्कि उनके संदेश को और भी जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी है।

राष्ट्रनिष्ठा व कर्मयोग की मिसाल
प्रो. संजय द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि मोदी की वाणी और कर्म एक दूसरे के पूरक हैं। उनका जीवन देश सेवा के लिए समर्पित है। इस कारण जनता उन पर सहज विश्वास करती है। उनके हर शब्द में देशवासियों की भलाई की चिंता झलकती है। उनके संकल्प, ईमानदारी और राष्ट्रप्रेम की वजह से उनका जनसमर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है।

माटी से जुड़ी महक
मोदी का सबसे बड़ा गुण यह है कि वे हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। उनकी साधारण पृष्ठभूमि ने उन्हें आमजन से जोड़कर रखा है। प्रो. संजय द्विवेदी के अनुसार, प्रधानमंत्री की संवाद शैली ‘भाषण’ नहीं बल्कि ‘हृदय से हृदय तक संवाद’ बन चुकी है। यही वजह है कि देश उन्हें जन-नेता के रूप में अपनाता है।



