उत्तर प्रदेश: के गोंडा जिले में 114 साल पुराने बिसुही पुल के निर्माण को लेकर जनआक्रोश अब उबाल पर है। पिछले 16 दिनों से जारी धरना-प्रदर्शन ने रविवार को उस समय नया मोड़ ले लिया जब राष्ट्रीय छात्र पंचायत के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को अपने खून से पत्र लिखकर पुल निर्माण की मांग दोहराई।
यह अनोखा और भावनात्मक विरोध प्रदर्शन पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि जल्द ही पुल निर्माण की घोषणा और कार्य शुरू नहीं किया गया, तो 25 फरवरी से सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया जाएगा।
📍 कहां है बिसुही पुल और क्यों है महत्वपूर्ण?
बिसुही पुल गोंडा जिले के ग्रामीण क्षेत्र को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला एक प्रमुख संपर्क मार्ग है। बताया जाता है कि यह पुल लगभग 114 साल पुराना है और अब जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पुल की हालत इतनी खराब है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार, यह पुल इटियाथोक ब्लॉक और आसपास के दर्जनों गांवों के लिए जीवनरेखा है। स्कूली बच्चे, किसान, व्यापारी और आम नागरिक रोजाना इसी पुल से आवागमन करते हैं।
🩸 खून से लिखा पत्र: विरोध का अनोखा तरीका
रविवार को प्रदर्शनकारियों ने इंजेक्शन के माध्यम से अपना खून निकालकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र लिखा। इस प्रतीकात्मक कदम ने प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राष्ट्रीय छात्र पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम पांडे ने कहा कि जब सरकार और प्रशासन उनकी आवाज नहीं सुन रहा, तो उन्हें मजबूरन ऐसा कदम उठाना पड़ा। उनका आरोप है कि 16 दिनों से जारी शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद कोई जिला स्तरीय अधिकारी या जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचे।

🗣️ “सरकार हादसे का इंतजार कर रही है”
शिवम पांडे ने कहा, “हम पिछले 16 दिनों से लगातार धरना दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन मौन है। क्या सरकार किसी बड़े सड़क हादसे का इंतजार कर रही है? अगर ऐसा हुआ तो उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”
इटियाथोक ब्लॉक अध्यक्ष रंजीत पांडे ने भी प्रशासन की उदासीनता पर सवाल उठाए और कहा कि जनता की मांग को नजरअंदाज करना लोकतंत्र के खिलाफ है।
🚨 25 फरवरी से सत्याग्रह की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर 25 फरवरी तक पुल निर्माण को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो वे सत्याग्रह आंदोलन शुरू करेंगे। इस आंदोलन में जिले भर के छात्र, किसान और सामाजिक संगठन शामिल होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मांग पूरी न होने पर इसे व्यापक जनआंदोलन में बदला जाएगा।
🏗️ पुल की वर्तमान स्थिति
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिसुही पुल पर दरारें आ चुकी हैं और कई हिस्से कमजोर हो चुके हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है। भारी वाहनों के गुजरने से पुल में कंपन महसूस होता है।
ग्रामीणों का दावा है कि कई बार छोटे हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला।

