नई दिल्ली: आमतौर पर 12 साल की उम्र में बच्चे स्कूल की पढ़ाई, खेलकूद और अपनी पसंदीदा गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं। लेकिन इसी उम्र में ऋषि शिव प्रसन्ना ने लेखन और तकनीक के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्होंने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई है। वह अब तक आठ किताबें लिख चुके हैं और तीन मोबाइल ऐप बनाने में भी योगदान दे चुके हैं। उनकी कहानी यह दिखाती है कि बच्चों की जिज्ञासा और सही दिशा में मिलने वाला प्रोत्साहन कम उम्र में भी नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकता है।
ऋषि की प्रतिभा केवल किताबें लिखने तक सीमित नहीं है। उन्हें कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और एंड्रॉइड ऐप विकसित करने में भी रुचि है। नवाचार के क्षेत्र में उनके काम के लिए उन्हें वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
कौन हैं ऋषि शिव प्रसन्ना और कहां रहते हैं?
ऋषि शिव प्रसन्ना मूल रूप से कर्नाटक के मैसूर जिले के नंजनगुड कस्बे के रहने वाले हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वह अपने माता-पिता के साथ बेंगलुरु के उत्तराहल्ली इलाके में रहते हैं। उनके पिता प्रसन्न कुमार एम. इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी मां राजेश्वरी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।
ऋषि की प्रतिभा का पता शुरुआती स्कूली वर्षों में ही चलने लगा था। नई चीजों को जानने और अलग-अलग विषयों को समझने में उनकी रुचि ने उन्हें पढ़ाई से आगे बढ़कर तकनीक और लेखन की दुनिया में कदम रखने के लिए प्रेरित किया।
उनकी उपलब्धियां इस बात का उदाहरण हैं कि बच्चों को सवाल पूछने, प्रयोग करने और अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिले, तो वे कम उम्र में भी उल्लेखनीय काम कर सकते हैं।
आठ किताबें लिखने के पीछे क्या है खास बात?
ऋषि ने 12 वर्ष की उम्र तक आठ किताबें लिखी हैं। उनकी रचनाओं का उद्देश्य बच्चों के लिए विज्ञान, कल्पना और ज्ञान जैसे विषयों को दिलचस्प अंदाज में पेश करना है। वह चाहते हैं कि बच्चे पढ़ाई को केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित न समझें, बल्कि नई चीजों को जानने की प्रक्रिया का आनंद भी लें।
उनकी पहली किताब Learn Vitamins with Harry Potter एक स्कूल लेखन प्रतियोगिता से प्रेरित होकर सामने आई थी। उस समय वह पहली कक्षा में पढ़ते थे। किताब के जरिए उन्होंने कहानी और जानकारी को जोड़ने की कोशिश की, ताकि बच्चों के लिए सीखना अधिक रोचक बन सके।
उनकी Titanium Time Travelers सीरीज में समय यात्रा और अलग-अलग ऐतिहासिक दौरों से जुड़ी कल्पनाओं को जगह मिली है। यह उनके लेखन में विज्ञान और कल्पना के मेल को दर्शाता है।

पांच साल की उम्र से कोडिंग में दिलचस्पी
ऋषि की कहानी का एक और अहम पहलू उनकी तकनीकी रुचि है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने करीब पांच साल की उम्र में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीखना शुरू किया था। आगे चलकर उन्होंने एंड्रॉइड ऐप विकसित करने पर काम किया और गूगल-प्रमाणित एंड्रॉइड डेवलपर के रूप में भी पहचान बनाई।
उनके नाम से जुड़े तीन ऐप हैं:
- IQ Test App for Kids: बच्चों के लिए आईक्यू टेस्ट से संबंधित ऐप।
- Countries of the World: दुनिया के देशों से जुड़ी जानकारी देने वाला ऐप।
- COVID Help for Bangaloreans (CHB): कोरोना महामारी के दौरान बेंगलुरु के लोगों को उपयोगी सहायता और जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया ऐप।
इन परियोजनाओं से पता चलता है कि ऋषि तकनीक को केवल सीखने तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उसे उपयोगी कामों में लगाने की कोशिश भी करते हैं।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से हुए सम्मानित
ऋषि शिव प्रसन्ना को नवाचार के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2023 से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उनकी कम उम्र में तकनीकी रुचि और रचनात्मक प्रयासों को मिली राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनकी प्रतिभा की सराहना कर चुके हैं।
यह उपलब्धि उन बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो पढ़ाई के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक, लेखन या नए आविष्कारों में रुचि रखते हैं। हालांकि, हर बच्चे की सीखने की गति और रुचियां अलग होती हैं। इसलिए किसी एक बच्चे की उपलब्धियों को सभी बच्चों के लिए एक जैसा मानक बनाने के बजाय उनकी अपनी क्षमताओं को पहचानना अधिक महत्वपूर्ण है।
ऋषि के IQ की आइंस्टीन से क्यों होती है तुलना?
ऋषि का IQ स्कोर 180 बताया जाता है। इसी आधार पर कई रिपोर्टों में उनकी तुलना वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के अनुमानित IQ से की गई है। हालांकि, आइंस्टीन का कोई प्रमाणित IQ स्कोर उपलब्ध नहीं है। इसलिए दोनों की बुद्धिमत्ता की सीधी तुलना को स्थापित वैज्ञानिक तथ्य की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
किसी व्यक्ति की क्षमताओं को केवल IQ के एक अंक से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। जिज्ञासा, रचनात्मकता, समस्याओं को सुलझाने की क्षमता, मेहनत और दूसरों के साथ मिलकर काम करना भी महत्वपूर्ण हैं।
ऋषि ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, शिक्षा और भविष्य की तकनीक जैसे विषयों में भी रुचि दिखाई है। उनका सफर बताता है कि सवाल पूछना और उन सवालों के जवाब खोजने की कोशिश करना सीखने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।



